सचिन और विराट कोहली भी कई बार एक गेंद पर ही आउट हो जाते हैं, बेटी हिम्मत न हारो
- प्रवेश परीक्षा में फेल होने के बाद रूपेश के परेशान रहने पर परिजनों ने उसको टेंशन न लेने की दी थी सलाह
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। कोई बात नहीं बेेटी, इस बार कम नंबर आए हैं, लेकिन अगली बार तुम जरूर पास हो जाओगी। कई बार सचिन से लेकर विराट कोहली भी एक ही गेंद में आउट हो चुके हैं। बेटी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। परीक्षा खराब होने के बाद घर पहुंची रूपेश से ये बात उसके पिता धर्मपाल ने कहीं थी। लेकिन फिर भी वह इस सदमे से उबर नहीं पायी।
भाई प्रवेश ने बताया कि रूपेश पढ़ने में काफी होशियार थी। बीएससी में भी उसने 83 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। पिछले कई दिन से वह 16 घंटे तक पढ़ाई कर प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी। यहीं नहीं ममता व भाई प्रवेश को भी हर बार मेहनत से पढ़ने की सीख देती थी। मगर प्रवेश परीक्षा में फेल होने के बाद शाम के समय रूपेश बहुत ही परेशान थी। उसने मम्मी पापा व भाई से कहा था कि उसे विश्वास नहीं हो रहा है कि उसके कम नंबर आए है। उसकी मेहनत भी किसी काम नहीं आई है। अब उसका आगे पढ़ने का कोई फायदा नहीं है। जिस पर परिजनों ने उसे सचिन तेंदुलकर व विराट कोहली का उदाहरण देते हुए परेशान न होने की सलाह दी थी। मगर वह परिवार के किसी सदस्य से बात भी नहीं कर पा रही थी। टेंशन में थी। इसके बाद ही ही उसने शनिवार की सुबह लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली मारकर आत्महत्या की।
ड्यूटी पर जाते समय अपने साथ क्यों नहीं ले गए रिवॉल्वर ?
गार्ड शनिवार की सुबह ड्यूटी पर चले गए थे। सवाल यह उठता है कि ड्यूटी पर वह अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर लेकर क्यों नहीं गए? शायद यदि रिवॉल्वर लेकर जाते तो छात्रा की जान बच सकती थी।
पांच मिनट पहले पहुंच जाता तो बचाई जा सकती थी बहन की जान
- छात्रा के एमडीयू में आत्महत्या करने के बाद घर पर सिर्फ उसकी बहन थी
- ऊपर के किवाड़ न खुलने पर छोटी बहन ने भाई प्रवेश को कॉल कर दी थी जानकारी
- सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर पहुंच गया था भाई, तब तक आत्महत्या कर चुकी थी बहन
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
मेरी बहन मुझे बहुत प्यार करती थी। हर बार मेहनत करने की सलाह देती थी। फिर भी वह छोड़कर चली गई। मै कभी भी बहन को माफ नहीं करूंगा। यह कहना था कि रूपेश के भाई प्रवेश का। उसका कहना था कि यदि वह सूचना मिलने के पांच मिनट से पहले ही घर पहुंचा जाता तो बहन को बचा सकता था। उसे बहन को नहीं बचाने को मलाल जिंदगी भर रहेगा।
प्रवेश ने बताया कि सुबह ही वह बहन को समझाकर एमडीयू की लाइब्रेरी में आ गया था। सुबह करीब 9.25 बजे छोटी बहन ममता ने काल की। कहा कि रूपेश टेंशन में है तथा ऊपर के कमरे में खुद को बंद कर लिया है। पापा की लाइसेंसी रिवॉल्वर भी साथ ले गई है। आप जल्दी से आ जाओ। प्रवेश ने बताया कि सूचना पाते ही वह तुरंत ही बाइक पर सवार होकर घर पहुंचा। रूपेश ने कमरे के किवाड़ बंद किए थे। वह किसी तरह पीछे के रास्ते से अंदर घुसा। मगर तब तक रूपेश गोली मारकर आत्महत्या कर चुकी थी। प्रवेश का कहना था कि यदि वह पांच मिनट से पहले ही पहुंच जाता तो बहन की जान बचा सकता था।
आत्म विश्वास खोते जा रहे युवा
रोहतक (ब्यूरो)। एमडीयू की छात्रा द्वारा प्रवेश परीक्षा में फेल होने का यह कोई पहला मामला नहीं है। पूर्व में भी रोहतक में इस तरह के मामले प्रकाश में आ चुके है। मगर इस तरह के मामलों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
फ्लैश बैक में जाए तो 11 जून को एमडीयू में फार्मेसी तृतीय वर्ष के छात्र हेम ने नहर में कूदकर आत्महत्या कर ली थी। परिजनों ने एक युवती के परिजनों पर आत्महत्या के लिये उकसाने की धाराओं में केस दर्ज कराया था।
इससे पूर्व आठ माह पूर्व ही रोहतक की कैलाश कालोनी के एक पीजी में लॉ द्वितीय वर्ष की छात्रा ने फ ांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या के कारणों का पता नहीं लग सका था।
एक साल पूर्व ही एमडीयू के गर्ल्स हास्टल में बी फार्मा की छात्रा ने पंखे से चुन्नी से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। छात्रा जींद की रहने वाली थी।
यह मामले तो बानगी भर मात्र है । इनके अलावा भी कई मामले प्रकाश में आ चुके है। मगर परिजन या फिर यूनिवर्सिटी प्रशासन इस तरह के मामलों पर अंकुश लगाने को गंभीर नहीं है।
सहनशीलता होती जा रही खत्म
रिटायर्ड सहकारिता निरीक्षक उम्मेद सिंह ने कहा कि आज के समय में देखने में आ रहा है कि बच्चों में सहनशीलता भी खत्म होती जा रही है। कम नंबर आने या फिर अन्य कारणों को बच्चे गंभीरता से लेकर टेंशन में रहने लगते है। अभिभावकों को समय निकालकर बच्चों को समय देना चाहिए। उनकी समस्या का समाधान करने का प्रयास करना चाहिए। साथ ही बच्चों से फ्रेें कली व्यवहार रखे।
पापा एक बार गले लगा लियो
आत्महत्या से पूर्व छात्रा ने सुसाइड नोट भी छोड़ा। जिस पर छात्रा ने लिखा था कि मम्मी-पापा सॉरी। मैं बहुत मेहनत कर रही थी। मैं बहुत पढ़ना चाहती थी और मेहनत करना चाहती थी, लेकिन मां पता नहीं... मेहनत का रिजल्ट नहीं मिला। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं। पापा मुझे एक बार गले जरू र लगा लेना। ममता का भी ध्यान रखना। वह यह सदमा लेकर नहीं जी पाएगी। मेरे पढ़ने के बावजूद भी मुझे कुछ नहीं मिला। मैं यह अपनी मर्जी से कर रही हूं। मम्मी-पापा मुझे माफ कर देना। मेरा बर्थडे भी आ रहा है। बहुत कुछ सोचा था पर क्या करूं, किस्मत ही धोखा दे गई। कोई नहीं आप बहुत ही अच्छे हो। मेरे बीएससी के 83 प्रतिशत कोई काम नहीं आए। मैं बहुत दुखी होगी। मम्मी माफ कर देना।
-रूपेश
पांच भाई बहनों में चौथे नंबर की थी रूपेश
प्रवेश ने बताया कि उसके अलावा परिवार में बहन आशा, ऊषा उसके बाद रूपेश व ममता है। रूपेश की मौत पर परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था। कॉलोनी के लोग पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे।