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मल्टीनेशनल कंपनियों से डाटा लीक कर ऑनलाइन ठगी का खुलासा, गिरोह का भंडाफोड़

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मल्टीनेशनल कंपनियों से डाटा लीक कर ऑनलाइन ठगी का खुलासा, गिरोह का भंडाफोड़
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
मल्टीनेशनल कंपनियों के कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर ऑनलाइन ठगी करने के गिरोह का खुलासा हुआ है। गिरोह के सदस्य कंपनियों से डाटा लेकर ऑनलाइन ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। जिला पुलिस की विशेष साइबर टीम ने इसी गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से फर्जी बैंक खातों की पासबुक सहित फर्जी आईडी और सिम मिले हैं। गिरोह के खुलासे के बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने आरोपियों को जेल भेज दिया।
29 जून को शिवम एंकलेव के करतार सिंह अरोड़ा ने सिविल लाइन थाने में केस दर्ज करवाया था। अरोड़ा ने बताया था कि उनके पास एक लड़की का फोन आया था। उसने कुछ ही दिनों में रुपये कई गुना करने की बात कही थी। इसके बाद डॉ. परमजीत सिंह लांबा नाम के व्यक्ति ने अरोड़ा से बात करके रुपयों को कई गुना करने का भरोसा दिलाया। आरोपियों के चंगुल में आने के बाद अरोड़ा ने उनकी तीन अलग बैंक खातों में 52 लाख 78 हजार रुपये जमा करवा दिए थे। रुपये जमा होते ही आरोपियों ने मोबाइल नंबर बंद कर दिया। इसके बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। इसके बाद ही मामले का खुलासा हुआ।
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एसपी ने गठित की टीम
मामले की तह तक जाने के एसपी पंकज नैन ने विशेष टीम का गठन किया था। टीम में साइबर सेल के एएसआई अमित सिंह सहित पांच पुलिस कर्मचारी शामिल थे। पुलिस ने जांच पड़ताल के दौरान 12 दिन पहले ही चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद गुपचुप तरीके से रिमांड लेकर उनसे पूछताछ की। पुलिस ने दिल्ली के आर्य समाज मंदिर निवासी हर्ष कुमार, मूलरूप से बिहार के गोपालगंज निवासी हाल नोएडा निवासी राहुल, मूलरूप से यूपी के शाहजहांपुर स्थित बांडा निवासी हाल फरीदाबाद निवासी विशाल कपूर और यूपी के गोरखपुर स्थित उतरी हुमांयूपुर हाल फरीदाबाद निवासी धंनजय को गिरफ्तार किया है। एसपी पंकज नैन ने बताया कि आरोपियों के पास से 9 लाख 50 हजार रुपये की नकदी सहित एक कार, कई एटीएम कार्ड, विभिन्न बैंकों की फर्जी खाता बुक, ग्राहकों को कॉल करने वाले क ई मोबाइल और फर्जी आईडी पर खरीदे गए सिम बरामद किया है।
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मल्टीनेशनल कंपनियां के कर्मचारी भी मिले हैं गिरोह से
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि देश की कुछ मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों के साथ आरोपियों की मिलीभगत है। कुछ रुपयों के लालच में कंपनी के कर्मचारी अपने ग्राहक का डाटा आरोपियों तक भेजते थे। इसमें अधिकतर ग्राहक का मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी जुटाई जाती थी।
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