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शादी करने के लिए पैरोल पर बाहर आने के बाद फरार हो रहे बदमाश

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रोहतक। प्रेमिका से किए गए वादे को पूरा करने के लिए प्रदेश के कुछ बदमाश पैरोल पर आने के बाद फरार हो रहे हैं। यही नहीं फरारी का मुख्य कारण प्रेमिका से शादी करना होता है। प्रेमिका से शादी करने के बाद वेष बदलकर उक्त बदमाश विभिन्न स्थानों पर रहते हैं। हाल ही में इस तरह के छह मामले सामने आ चुके हैं। इनमें बदमाशों ने पकड़े जाने के बाद पैरोल के बाद फरार होने का मुख्य कारण प्रेमिका से विवाह रचाना बताया है। इस तरह के मामलों की बानगी
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केस नंबर-एक
सीआईए-1 ने हाल ही में कैलाश कॉलोनी के रहने वाले 25 हजार के इनामी बल्लू को गिरफ्तार किया। बल्लू वर्ष 2014 में पैरोल पर आने के बाद फरार हो गया था। इनामी ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह प्रेमिका से शादी करने के लिए पैरोल पर आने के बाद फरार हो गया था। शादी के बाद पानीपत से लेकर करनाल और सोनीपत में रह रहा था।
केस नंबर-दो
एसटीएफ ने मार्च में 20 हजार के इनामी पानीपत के सुनील को गिरफ्तार किया। उस पर लूट के कई मामले दर्ज थे। वर्ष 2015 में वह पैरोल पर आने के बाद फरार हो गया था। इनामी ने खुलासा किया कि प्रेमिका से उसने शादी करने का वादा किया था। इसी वायदे को निभाने के लिए वह पैरोल पर आने के बाद फरार हो गया। शादी करने के बाद यूपी के विभिन्न स्थानों पर वेष बदलकर रह रहा था।
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केस नंबर-तीन
एसटीएफ ने जनवरी में 25 हजार के इनामी सोनू को गिरफ्तार किया। सोनू पैरोल पर आने के बाद फरार हो गया था। इनामी ने पूछताछ मेंखुलासा किया कि प्रेमिका से शादी करने के लिए फरार हुआ था। शादी के बाद हरियाणा और दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर वेष बदलकर पत्नी के साथ रह रहा था।

शादी के बाद आती अपराधों में कमी
पुलिस के अनुसार देखने में आया है कि प्रेमिका से शादी के बाद बदमाशों के अपराध करने में कमी आती है। जबकि पूर्व में उन पर लूट से लेकर हत्या और चोरी के कई केस दर्ज हैं। कोई ऑटो चलाकर परिवार का पालन पोषण करता है तो कोई मजदूरी कर परिवार पालता है।
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60 से अधिक पैरोल पर आने के बाद फरार हुए बदमाशों की तलाश
किलोई का मनीष, मकड़ौली का सुरेंद्र, पांच हजारी राजेश, 25 हजारी जगबीर, झज्जर का रमन, पानीपत का मनोज, सोनीपत का सोनू समेत करीब 60 बदमाश अभी भी पैरोल पर आने के बाद फरार चल रहे हैं। पुलिस से लेकर सीआईए भी पैरोल पर आने के बाद फरार हुए बदमाशों को पकड़ने में नाकाम है।

कैसे मिलती है पैरोल
वरिष्ठ अधिवक्ता करण सिंह के अनुसार किसी अपराधी द्वारा अपनी सजा का एक बड़ा भाग काटने के बाद अच्छे आचरण की वजह से उसे जेल से कुछ समय के लिए मुक्त किया जाना पैरोल होता है। यह समय एक निश्चित अवधि के लिए होती है। कोर्ट में एप्लीकेशन देकर इसकी अवधि को आगे बढ़वाया जा सकता है।

कितनी बार मिल सकती है पैरोल
अगर कोर्ट में केस चल रहा है तो न्यायाधीश अपनी मर्जी से कितनी बार भी पैरोल दे सकता है। मगर जेल में बंद सजायाफ्ता कैदी को साल में दो बार ही पैरोल मिलती है। लेकिन स्थिति और जरूरत के हिसाब से अपराधी को दो बार से ज्यादा भी पैरोल दी जा सकती है। ताकि वह अपने परिवार के किसी समारोह और दुख, खुशी में शामिल हो सके।

दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी
वरिष्ठ अधिवक्ता करण सिंह के अनुसार पैरोल पर आने के बाद फरार होने वाले कैदियों को दो साल की अतिरिक्त सजा और जुर्माने का प्रावधान है। इस स्थिति में कैदी को दोबारा पैरोल भी नहीं मिलता है।
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