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डॉक्टरों के हंगामे के चलते दो घंटे तक आवास में बंधक बनी रहीं एचओडी

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रोहतक। पीजीआई में बहन की शादी के लिए छुट्टी न मिलने पर डॉक्टर ओंकार के आत्महत्या करने के मामले ने देर रात तूल पकड़ लिया। गुस्साए डॉक्टरों ने दो घंटे तक न सिर्फ जमकर हंगामा किया, बल्कि बाल रोग विभाग एचओडी डॉ. गीता गठवाला के आवास पर भी जाकर तोड़फोड़ की। डॉक्टरों के गुस्से को देखते हुए एचओडी दो घंटे तक आवास के अंदर ही परिवार समेत बंधक बनी रहीं। बार-बार बुलाने के बाद भी बाहर नहीं आईं। मामले की सूचना पाते ही वीसी पहुंचे।
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डॉक्टरों को समझाने का प्रयास किया तो गुस्साए छात्र उन्हीं से भिड़ गए और उनके खिलाफ नारेबाजी करनी शुरू कर दी। आरोप था कि एचओडी ने मौके पर पहुंचकर डॉक्टर के शव को देखना तक मुनासिब नहीं समझा। इसके बाद वीसी के आश्वासन पर डॉक्टर किसी तरह शांत हुए। एचओडी को पैदल ही करीब डेढ़ किलोमीटर तक आवास से लेकर हॉस्टल नंबर 33 तक अपने साथ लेकर गए। डॉक्टर काफी आक्रोशित थे। इसके चलते उन्होंने खूब नारेबाजी की।

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शव उठाने के लिए पहुंची एम्बुलेंस, मगर नहीं था स्ट्रेचर
मामले की सूचना पाते ही पुलिस एम्बुलेंस के साथ पीजीआई पहुंची। जैसे ही कर्मी शव को उठाने आए, लेकिन उनके पास स्ट्रेचर भी नहीं था। इस पर छात्रों के गुस्से के सामने एम्बुलेंस चालक को बैरंग की वापस जाना पड़ा।
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रेजिडेंट डॉक्टरों का आरोप कंसल्टेंट डॉक्टर नहीं करते काम
हंगामा कर रहे रेजीडेंट डॉक्टरों का आरोप था कि कंसल्टेंट खुद काम नहीं करते हैं। प्रत्येक कामों में उन को आगे कर दिया जाता है। इसके कारण कई बार उन्हें परेशानी भी होती है। बच्चा चोरी से लेकर अन्य यदि कोई मामला हो जाता है तो केस भी उन्हीं के खिलाफ दर्ज कराए जाते है।
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