फ्लैग : प्रदेश का बहुचर्चित महम कांड में एडीजे कोर्ट का सात को नोटिस
हेडिंग : इनेलो नेता अभय चौटाला पांच सितंबर को अदालत में पेश
: खरक जाटान निवासी रामफल ने दायर की थी अदालत में याचिका
: याचिकाकर्ता के बड़े भाई की हो गई थी 1990 में मौत
: महम कोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका, एडीजे कोर्ट में दायर की थी अपील
: अदालत ने नोटिस भेजकर पक्ष रखने के लिए कहा
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। प्रदेश के बहुचर्चित महम कांड की यादें फिर ताजा हो गई हैं। एडीजे फखरुद्दीन की अदालत ने इनेलो नेता अभय चौटाला, पूर्व डीआईजी शमशेर सिंह अहलावत, करनाल के पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र, भिवानी के डीएसपी रहे सुखदेव राज राणा व गांव दरियापुर के भूपेंद्र उर्फ भूपी, हिसार के गांव दौलतपुर निवासी पप्पू और फतेहाबाद जिले के गांव गिल्ला खेड़ा निवासी अजीत सिंह को नोटिस जारी किया है। नोटिस के तहत पांच सितंबर को पेश होकर पक्ष रखने के लिए कहा है। इसके लिए भिवानी जिले के गांव खरक जाटान निवासी रामफल ने याचिका दायर की थी, जो फिलहाल माडल टाउन रोहतक में रह रहे हैं।
रामफल ने अपने वकील एसएस सांगवान के माध्यम अदालत में सीआरपीसी की धारा 397 के तहत याचिका दायर की। दायर इस्तगासे के मुताबिक याचिकाकर्ता का कहना है कि वह 27 फ रवरी 1990 को हुए मतदान के बाद शाम करीब छह बजे अपने परिवार के साथ घर में बैठे हुए थे। उसका बड़ा भाई हरी सिंह भी मौके पर मौजूद था। तभी वहां पंचायती उम्मीदवार आनंद सिंह दांगी पहुंचे और उन्होंने हरी सिंह से अगले दिन सुबह होने वाले पुनर्मतदान के लिए प्रचार में मदद करने की अपील की। हरी सिंह दांगी के साथ चल पड़े। 28 फरवरी को सुबह आठ बजे बैंसी के राजकीय कन्या हाईस्कूल के गेट पर पहुंचे, पुनर्मतदान के लिए वोटिंग शुरू हो चुकी थी। वहां पर हरी सिंह स्कूल के गेट पर खड़ा था। तभी देखते ही देखते अचानक तीन चार वाहन स्कूल के गेट पर पहुंचे। वाहनों में शमशेर सिंह अहलावत, अभय सिंह चौटाला, भूपेंद्र सिंह उर्फ भूपी निवासी दरियापुर व अन्य लोग सवार थे। वे मतदान केंद्र की ओर बढ़ने लगे तो आनंद सिंह दांगी के भाई धर्मपाल दांगी ने बूथ के अंदर प्रवेश न करने के कहा। इस बात को लेकर झगड़ा हो गया। इस दौरान गोली लगने से धर्मपाल दांगी के साथ खड़े निंदाना निवासी दलबीर गिर पड़े। इसके बाद गेट के आसपास खड़ी पब्लिक को निशाना बना कर फायरिंग की गई। एक गोली याचिकाकर्ता के भाई हरी सिंह को लगी। हरी सिंह सड़क पर गिर पड़ा। उसे पीजीआई ले जाने लगे, लेकिन लाखनमाजरा के पास उसके भाई ने दम तोड़ दिया।
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पुलिस ने नहीं करवाया पोस्टमार्टम, खुद ही कर दिया अंतिम संस्कार
याचिकाकर्ता का आरोप है कि 28 फ रवरी 1990 को ही उसने महम पुलिस स्टेशन में एफआईआर के लिए शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने 1 मार्च 1990 को एफ आईआर नंबर 76/90 दर्ज की। उसमें आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस ने उसके भाई हरी सिंह का पोस्टमार्टम तक नहीं होने दिया। खुद ही पुलिस ने अंतिम संस्कार कर दिया। मामले में कार्रवाई की जाए। अदालत ने अपील को स्वीकार करते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर 5 सितंबर 2018 को पेश होकर पक्ष रखने के लिए कहा है।
ये था महम कांड
1989 में ताऊ देवीलाल देश के उप प्रधानमंत्री बन गए। उनकी जगह चौधरी ओमप्रकाश चौटाला प्रदेश के सीएम बने। उस समय चौटाला राज्य विधानसभा के सदस्य नहीं थे। नियमों के तहत मुख्यमंत्री बने रहने के लिए नियमानुसार छह माह के अंदर उनका विधानसभा का चुनाव जीतना अनिवार्य था। चौधरी देवीलाल ने सांसद बनने के बाद महम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में विधानसभा की महम सीट खाली थी। चुनाव आयोग ने महम विधानसभा का उपचुनाव कराने के लिए 27 फ रवरी 1990 का दिन तय किया। तत्कालीन सीएम ओमप्रकाश चौटाला ने चुनाव लड़ने के लिए महम से अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। उसी समय ताऊ देवीलाल के करीबी व कांग्रेस के मौजूदा विधायक आनंद सिंह दांगी ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन पर से इस्तीफा देकर महम से पंचायती उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया। चुनाव में माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। इसके चलते चुनाव आयोग ने धांधली की शिकायतों के मद्देनजर आठ मतदान केंद्रों (बूथों) बैंसी, चांदी, महम, भैणी महाराजपुर और खरैंटी में पुनर्मतदान कराने का फैसला किया। पुनर्मतदान के दिन हिंसा हो गई। हिंसा में 10 लोग मारे गए, जिसमें याचिकाकर्ता रामफल का भाई हरीसिंह भी शामिल था।
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महम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की अपील खारिज की थी। इसके चलते एडीजे कोर्ट में अपील की थी। अदालत ने अपील स्वीकार कर अभय चौटाला सहित सात लोगों को नोटिस किए हैं। इसमें 5 सितंबर तक पेश होकर जवाब देने के लिए कहा गया है।
-एडवोकेट एसएस सांगवान, याचिकाकर्ता के वकील