हेडिंग : पीजीआईएमएस में किडनी रोगी के लिए न डॉक्टर मिला और न ही वेंटीलेटर, 16 घंटे बाद मरीज दिल्ली ले गए तीमारदार
-किडनी रोगी को 11 घंटे बाद नेफ्रोलॉजिस्ट मिला
साढे़ 16 घंटे की जद्दोजहद के बाद मरीज को ले जाना पड़ा एम्स दिल्ली
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। एम्स दिल्ली के बाद टॉप-टू रैंकिंग में गिने जाने वाले पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में किडनी रोगी को 11 घंटे बाद नेफ्रोलॉजिस्ट मिला। इसके बाद भी डॉक्टरों ने वेंटीलेटर न होने की बात कह कर पल्ला झाड़ लिया। मरीज को दिल्ली या चंडीगढ़ ले जाने की सलाह दी गई, लेकिन एम्बुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई। करीब 16 घंटे के बाद तीमारदार मरीज को निजी एम्बुलेंस से एम्स दिल्ली ले गए।
तीमारदार राज ने बताया कि 11 साल के दीपू को किडनी की समस्या थी और वह काफी गंभीर स्थिति में था। हिसार के जिंदल अस्पताल में डॉक्टरों ने इलाज किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। लगभग डेढ़ लाख रुपये का बिल बना दिया और कहा कि वह अपने मरीज को पीजीआईएमएस रोहतक लेकर जाएं। अब मरीज को बचा पाना उनके बस में नहीं है। सिरसा निवासी दीपू को परिजन सोमवार रात साढे़ 12 बजे मरीज को लेकर पीजीआईएमएस के इमरजेंसी विभाग पहुंचे। यहां मरीज को दर्द का इंजेक्शन तक नहीं दिया गया और कहा कि उनके यहां नेफ्रोलॉजिस्ट नहीं है वह अपने मरीज को दिल्ली या चंडीगढ़ पीजीआईएमएस में लेकर चले जाएं। परिजनों ने इसके बाद भी इलाज की आस में बच्चे को वहीं रखा।
नेफ्रोलॉजिस्ट मिला तो नहीं मिला वेंटीलेटर
मरीज के पीजीआई में लाने के करीब 11 घंटे बाद मंगलवार को सीआरएस ओपीडी में तीमारदारों को नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमित मान मिले। इसके बाद उन्होंने मरीज को देखा। उपचार के लिए जब डॉक्टर ने कहा तो बाल रोग विभाग ने यह कहते हुए हाथ खडे़ कर दिए कि उनके पास वेंटीलेटर खाली नहीं है। जबकि मरीज को हर हाल में वेंटीलेटर चाहिए था। इसके बाद मरीज को दिल्ली ले जाना परिजनों के लिए मजबूरी बन गया। परिजनों ने बताया कि संस्थान ने मरीज को दिल्ली ले जाने के लिए एम्बुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई। उनसे इतने कागज मांग लिए गए कि वह उपलब्ध नहीं करा पाए और मजबूरी में वह प्राइवेट एम्बुलेंस ले 16 घंटे बाद मंगलवार शाम करीब साढ़े चार बजे मरीज को दिल्ली एम्स ले गए।
नहीं उतरा बुखरा तो परिजन हुए गंभीर
तीमारदारों ने बताया कि दीपू तीसरी कक्षा में पढ़ता है, लेकिन बीमारी के चलते वह चार-पांच माह से पढ़ाई नहीं कर रहा था। उसे नकसीर आई थी और बुखार हो गया था, इसके बाद मरीज का बुखार नहीं उतरा। लगभग 15 से 20 दिन बाद वह ठीक हो गया, लेकिन अब फिर समस्या हो गई थी।
तीन नेफ्रोलॉजिस्ट संस्थान में और बाल रोग विभाग को पता नहीं
आपात विभाग में बाल रोग विभाग के डॉक्टर तीमारदारों को सारी रात यह कहते रहे कि उनके यहां नेफ्रोलॉजिस्ट नहीं हैं। जबकि संस्थान में कुल सचिव डॉ. एचके अग्रवाल, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नित्यानंद शर्मा नेफ्रोलॉजी की ओपीडी चलाते हैं। यही नहीं नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमित मान भी संस्थान में कार्य कर रहे हैं, इसके बावजूद संस्थान द्वारा नेफ्रोलॉजिस्ट न होने की बात कहा जाना समझ से परे है।
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दम तोड़ रहा नेफ्रोलॉजी विभाग, कैसे बचे मरीजों की जान
लाला श्याम लाल अति विशिष्ट चिकित्सा केंद्र में नेफ्रोलॉजी विभाग दम तोड़ रहा है। यहां विभागाध्यक्ष डॉ. अमित मान को संस्थान ने निलंबित किया तो उस आदेश को चुनौती देते हुए डॉ. मान कोर्ट से स्टे ले आए। अब डॉ. मान ओपीडी कर रहे हैं यह बताने वाला भी कोई नहीं है। यही नहीं स्थिति यह है कि नेफ्रोलॉजी जैसे अहम विभाग में न तो प्रशासन ने कोई हाउस सर्जन दिया है और न ही कोई पीजी डॉक्टर। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या डॉक्टर अमित मान अकेले ओपीडी और वार्ड में 24 घंटे सेवाएं देंगे। अधिकारियों ने विभाग में कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने की बजाए इस पर ताला लगाना ही सही समझा है। स्थिति यह है कि विभागाध्यक्ष और प्रशासन की जंग में परेशानी मरीजों को झेलनी पड़ रही है। इसके चलते किडनी के रोगियों को अब निजी अस्पताल या दिल्ली और चंडीगढ़ जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।