यूनिवर्सिटी का चोरी से इन्कार, पुलिस और कॉपियां बरामद करने की तैयारी में
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। बी फार्मेसी की परीक्षा की कॉपी बदलकर पास कराने के मामले में पुलिस कड़ी से कड़ी जोड़ रही है। पुलिस को आशंका है कि आरोपियों ने सारी कॉपियां बरामद नहीं करवाई हैं। आरोपियों के पास और उत्तर पुस्तिकाएं मिल सकती हैं। पुलिस ने तीनों आरोपियों के घर और दोस्तों के ठिकानों पर छापेमारी भी की है। हालांकि हेल्थ यूनिवर्सिटी प्रशासन अभी भी मानने को तैयार नहीं है कि कॉपियों चोरी की गईं हैं।
यूनिवर्सिटी प्रशासन का दावा है कि स्ट्रांग रूम में रखीं कापियों की सोमवार को जांच की गई। हल की गईं सभी कॉपियां सुरक्षित हैं। ऐसे में सबसे अहम सवाल यह है कि पुलिस ने कौन सी उत्तर पुस्तिकाएं पकड़ीं हैं। आरोपियों ने भी कबूला है कि यूनिवर्सिटी के अधिकारी भी इस खेल में मिले हुए हैं। एक आरोपी जसवंत यूनिवर्सिटी में सुरक्षा गार्ड रह चुका है। सूत्रों की मानें तो पकड़ी गई कॉपियों में से कुछ कैथल के आरकेएसडी फार्मेसी कॉलेज की हैं। कॉलेज प्रबंधन का भी कहना है कि उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी परीक्षा नियंत्रक की है। इसमें हमारा कोई लेना-देना नहीं है।
अब तक हुई जांच में पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि विकास ने करीब 28 अभ्यर्थियों को जाल में फंसाकर नीरज से मिलवाया था। इसके बाद उनसे एडवांस में रुपये लिये थे। पुलिस ने मामले में पकड़े गए तीसरे आरोपी मदीना निवासी विकास उर्फ ढिल्लू को सोमवार को कोर्ट में पेश किया। यहां से उसे पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस उस कर्मचारी का नाम उगलवाने के प्रयास में है जिसकी मिलीभगत से पीजीआई से कापियां चोरी की गईं।
पुलिस बिना कोई पुख्ता सुबूत के पीजीआई के अधिकारियों पर हाथ डालना नहीं चाहती। इसकी कारण आरोपियों पर सख्ती बरती जा रही है। आदर्श नगर निवासी नीरज और आदर्श नगर के जसवंत को पुलिस ने सात दिनों की रिमांड पर लिया है। मदीना का विकास उर्फ ढिल्लू पांच दिन के रिमांड पर है।
पुलिस की जांच ढीली, नहीं लगा मिलीभगत करने वाले का पता
मामले में पुलिस की जांच ढीली पड़ने लगी है। एक तरफ पुलिस दावा कर रही है कि आरोपियों से बरामद की गई कॉपियां पीजीआई की हैं। लेकिन खुलासे के तीन बाद भी पुलिस मिलीभगत करने वाले पीजीआई कर्मचारी का पता नहीं कर सकी है। पुलिस यह भी स्पष्ट नहीं कर सकती है कि पीजीआई से कापियां किसने और कैसे चोरी करवाईं।
पीजीआई प्रशासन ने शिकायत में खबरों को बनाया आधार
प्रशासन को अखबारों में प्रकाशित खबर के माध्यम से पता चला कि पीजीआई बी फार्मेसी की कुछ कॉपियां सेक्टर एक के मकान में मिलीं हैं जांच के लिए पीजीआई की ओर से कमेटी गठित की गई है। निवेदन है कि पुलिस जांच करे कि ये कॉपियां पीजीआई की है या पकड़े गये आरोपियों ने फर्जीवाड़ा कर छपवाईं हैं। यह भी जांच की जाए कि मामले में किसी पीजीआई कर्मचारी की मिलीभगत है या नहीं।
कॉलेज का नहीं है कोई लेना-देना : प्रिंसिपल
कैथल स्थित आरकेएसडी फार्मेसी कॉलेज के विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं भी आरोपियों से मिलीं हैं। कॉलेज प्रिंसिपल एससी अरोड़ा से इस बारे में जांच टीम ने संपर्क किया है। प्रिंसिपल एससी अरोड़ा ने बताया कि कॉलेज का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। वैसे भी बरामद की गईं उत्तर पुस्तिकाएं वर्ष 2012-13 की हैं। परीक्षा के बाद ऑब्जर्वर उत्तर पुस्तिकाएं साथ ले जाते हैं। इसके बाद वे उन्हें कहां रखते हैं? इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। यदि इस साल की उत्तर पुस्तिकाएं भी हैं तो भी कॉलेज का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। पिछले तीन साल से यहां परीक्षा केंद्र ही नहीं बना है।
फार्मेसी चौथे साल का परिणाम आया
हेल्थ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बी फार्मेसी के चौथे सेमेस्टर का परीक्षा परिणाम देर शाम जारी कर दिया। परीक्षा नियंत्रक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि अन्य वर्षों का परीक्षा परिणाम लगभग तैयार है, ऐसे में उत्तर पुस्तिका बाहर जाने का कोई मतलब ही नहीं बनता। यहां उच्च तकनीक के 32 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। स्ट्रांग रूम में जाने के लिए ताले की चाबी और थंब इंप्रेशन की जरूरत होती है। यह दोनों सुविधाएं सिर्फ स्टाफ सदस्यों के पास ही हैं।
तीसरे आरोपी को पांच दिन के रिमांड पर लिया गया है। अभी तक मामले में पीजीआई के किसी कर्मचारी का नाम सामने नहीं आया है। पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों ने पीजीआई से कैसे कॉपियां चोरी की।
- मनोज कुमार, प्रभारी एंटी व्हीकल थेफ्ट एंड डिटेक्शन टीम।