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एचआईवी पॉजीटिव महिला तीन दिन पर इमरजेंसी के बाहर तड़पती रही और किसी ने नहीं देखा..

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हेडिंग : एचआईवी पॉजीटिव महिला तीन दिन तक इमरजेंसी के बाहर तड़पती रही और किसी ने नहीं देखा
-पीजीआई में एचआईवी पॉजीटिव दंपति की मौत मामले की जांच के लिए पहुंचीं महिला आयोग चेयरपर्सन बोलीं, डॉक्टरों की लापरवाही आई सामने
-मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने के दिए निर्देश, 20 दिन में देनी है रिपोर्ट
-सीडब्ल्यूसी चेयरमैन के साथ डायरेक्टर से की मुलाकात, वार्ड व बाल आश्रम का दौरा
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। एचआईवी पॉजीटिव दंपति की मौत के मामले में सोमवार को जांच शुरू हुई। पीजीआई निदेशक कार्यालय में ढाई घंटे बहस चली। इस मुद्दे से जुड़े तथ्य व दस्तावेज जुटाए। वार्ड, इमरजेंसी व दंपति के बच्चों का हाल जानने के लिए हरिओम सेवादल आश्रम का दौरा किया। इस दौरान डॉक्टर की लापरवाही सामने आई है। इमरजेंसी में तीन दिन तक पीड़िता तड़पती रही और किसी ने उसे देखा तक नहीं। वहां गार्ड होते हैं। सफाई कर्मचारी, बैरर होते हैं। डॉक्टर या प्रशासन ने भी उसकी ओर ध्यान नहीं दिया। पीड़िता को इलाज मिलना चाहिए था। यह कहना है राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन प्रतिभा सुमन का। वे सोमवार को एचआईवी पॉजीटिव दंपति की मौत मामले में पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं।
चेयरपर्सन ने कहा कि एचआईवी पीड़ित का इलाज के अभाव में मरना जांच का विषय है। आरोपी कौन है, डॉक्टर या कोई और यह तभी पता लगेगा। उस पर जांच रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए एक कमेटी गठित की जाएगी। इसमें महिला आयोग के अलावा सीडब्ल्यूसी, पीजीआई के डॉक्टर, एचआईवी पॉजीटिव के संगठन नेटवर्क ऑफ पॉजीटिव पीपल के सदस्य भी इसमें शामिल रहेंगे। यह कमेटी 20 दिन में अपनी रिपोर्ट आयोग को पेश करेगी। भविष्य में ऐसा मामला प्रदेश में ना हो, इसके लिए आयोग सख्त कदम उठाएगा। सरकार को डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए लिखा जाएगा। हालांकि, डॉक्टर खुद को निर्दोष बता रहे हैं। उनका दावा है कि हमारी तरफ से कोई कमी नहीं रही। मरीज का जो इलाज बनता था, वह दिया गया है। असलियत जानने के लिए मौके पर मौजूद दो युवकों को तलाशा जा रहा है। इनमें से एक ने तो महिला को रोटी लाकर दी थी। इसके बाद मामले में कार्रवाई आसान हो जाएगी।
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बच्चियों के पुनर्वास की व्यवस्था होगी
सीडब्ल्यूसी चेयरमैन डॉ. राज सिंह सांगवान ने कहा कि एचआईवी पीड़ित दंपति की मौत के बाद उनकी बच्चियों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। उनकी दादी के बारे में पता लगा है। वह जींद की रहने वाली है। इसके अलावा मामा-मामी भी सामने आए हैं। इन दोनों पक्षों से बातचीत करने व दस्तावेज जांचने के बाद बच्चियों के सर्वोत्तम हित देखते हुए उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। इस मामले में नक्शा भी बनवाया जाएगा। इसमें महिला कहां रही, कहां इलाज मिला, यह सब देखा जाएगा।
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सोनीपत अस्पताल में उल्टी-दस्त की भी दवा नहीं
आयोग की चेयरपर्सन ने कहा कि इस मामले में सोनीपत सिविल अस्पताल व खानपुर मेडिकल कॉलेज की भी गलती है। एचआईवी पॉजीटिव महिला को क्यों रेफर किया गया, वहां दवा नहीं थी, डॉक्टर नहीं था, क्या वजह रही, यह बड़ा सवाल है। महिला के कार्ड में उल्टी दस्त की दवाएं लिखी हैं। यही लिख कर मरीज को रेफर करना बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। क्या सोनीपत के सिविल अस्पताल में उल्टी दस्त की भी दवा नहीं है। यही नहीं अस्पताल ने मरीज को रेफर भी गलत किया। उसे पीजीआई के बजाय खानपुर मेडिकल भेजा गया। पीजीआई में भी उसे जरूरी इलाज नहीं मिला। गलती सबकी है। कार्रवाई भी सब पर होगी। डॉक्टर का काम जीवन देना है, लेना नहीं। डॉक्टरों ने मरीज की पहचान भी उजागर की है। यह भी गलत है। आयोग हर बात का ध्यान रखते हुए मामले में कार्रवाई करेगा।
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