इलाज के लिए 18 घंटे ट्रॉमा सेंटर, ओपीडी और सुपर स्पेशलिटी सेंटर के चक्कर लगाता रहा बंदी, मरने के बाद पहुंचा इमरजेंसी
पीजीआई में 18 घंटे इलाज के लिए भटकने के बाद बंदी ने तोड़ा दम
- ट्रॉमा सेंटर, ओपीडी व लाला श्याम लाल सुपर स्पेशलिटी सेंटर के बीच चक्कर लगवाते रहे डॉक्टर, मरने के बाद इमरजेंसी भेजा
- देर रात तक नहीं हुई पुलिस कार्रवाई, सवालों के घेरे में व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
जिला कारागार सुनारिया से इलाज के लिए पीजीआई लाए गए बंदी ने इलाज के इंतजार में दम तोड़ दिया। जेल पुलिस की सुरक्षा में वह 18 घंटे तक कभी ट्रॉमा सेंटर, कभी ओपीडी तो कभी लाला श्याम लाल सुपर स्पेशलिटी सेंटर में चक्कर लगाता रहा। दम तोड़ने के बाद उसे इमरजेंसी भेज दिया गया। इमरजेंसी से पुलिस को रुक्का जारी होने के बाद भी देर रात तक मामले में कार्रवाई नहीं हुई। मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम होने की उम्मीद है।
जेल में बंद कैथल के सिलानी निवासी 65 वर्षीय योगेंद्र को पुलिस रविवार रात करीब नौ बजे पीजीआई लाई थी। उसकी तबीयत खराब होने के चलते पुलिस उसे लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंची। यहां रात भर उसे रखने के बाद सुबह ओपीडी भेज दिया गया। यहां से उसे लाला श्याम लाल सुपर स्पेशलिटी सेंटर में हृदय रोग चिकित्सक के पास भेज दिया। इस दौरान सभी ने उसे सामान्य बताते हुए वापस जाने की सलाह दी। यही नहीं 18 घंटे तक इलाज की इंतजार में भटकने के बाद भी उसे भर्ती नहीं किया गया। सोमवार दोपहर करीब तीन बजे उसने दम तोड़ दिया।
इसके चलते उसे इमरजेंसी भेज दिया गया। यहां डॉक्टर ने उसे ब्राउट डेड बताते हुए रुक्का पुलिस को भेज दिया। इसके बाद भी देर रात तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। बंदी के साथ आई पुलिस शव छोड़ कर चली गई। इस बारे में बंदी के साथ आई पुलिस के एक अधिकारी से बात की गई तो उसने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
घटना ने व्यवस्था पर उठाए सवाल
इलाज के लिए आए बंदी का पीजीआई में दम तोड़ना व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। पीजीआई में डॉक्टरों ने ना तो उसे लेकर किसी तरह की गंभीरता दिखाई और ना ही उसे भर्ती करने की जहमत उठाई। यही नहीं साथ आए पुलिस के जवानों ने भी बंदी की मौत के बाद वहां से रवानगी ले ली। इस मामले को लेकर देर रात तक किसी तरह की शिकायत नहीं हुई थी। मंगलवार को परिजनों के आने पर कार्रवाई होने की संभावना है।