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गुरमीत राम रहीम के स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन चिंतित
सुनारिया जेल से पीजीआई तक की मॉक ड्रिल, तीन घंटे परेशान रहे मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म करने के मामले में सुनारिया जेल में बंद राम रहीम के स्वास्थ्य को लेकर जिला प्रशासन काफी चिंतित है। इसके चलते शनिवार को सुनारिया जेल से पीजीआई तक मॉक ड्रिल की गई। इसमें जांचा गया कि यदि जेल में गुरमीत का स्वास्थ्य बिगड़ता है तो कितनी देर में उसे प्रशासन अस्पताल तक पहुंचा सकता है। पुलिस, पैरा मिलिट्री फोर्स और संस्थान ने इस प्रक्रिया को इस प्रकार पूरा किया कि सभी को लगा कि सच में ही बाबा को उपचार के लिए संस्थान में लाया गया है। इस दौरान करीब तीन घंटे तक मरीज परेशान रहे।
गुरमीत राम रहीम का स्वास्थ्य बिगड़ने की स्थिति में यदि जेल के डॉक्टर उसे पीजीआई रेफर करते हैं तो उसे उपचार के लिए महज 12 से 15 मिनट में प्रशासन संस्थान में ला सकता है। इसका अभ्यास शनिवार को प्रैक्टिकल करके देखा गया। पीजीआई से एक एंबुलेंस में दो डॉक्टर, एक मेल नर्स और एक ईसीजी एक्सपर्ट को सुनारिया जेल भेजा गया। कई गाड़ियों के काफिले के बीच एक आम आदमी को राम रहीम का डमी बना कर एंबुलेंस में लाया गया। काला कपड़ा ढके व्यक्ति को वार्ड 24 के पिछले गेट पर उतारा गया और उसे सीधा वार्ड 24 के कमरा नंबर 105 में ले जाया गया। हालांकि अधिकारी इसे महज एक सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं, लेकिन यह पूरा कार्यक्रम राम रहीम के लिए किया गया। पीजीआई के डायरेक्टर डॉ. राकेश गुप्ता एवं पुलिस विभाग का कहना है कि इस तरह के मॉक ड्रिल वह समय समय पर करते रहते हैं। इसमें देखा जाता है कि जरूरत पड़ने पर कैदियों को जेल से अस्पताल तक कितनी देर में और कितना सुरक्षित लाया जा सकता है।
पीजीआई स्टाफ को नहीं करने दिया मोबाइल और फोन का इस्तेमाल
मॉक ड्रिल के दौरान पीजीआई प्रशासन की ओर से स्टाफ को हिदायत दी गई की कोई भी अपने मोबाइल या कार्यालय के फोन से बाहर फोन नहीं करेगा। सभी स्टाफ सदस्यों को करीब तीन घंटे तक फोन का इस्तेमाल नहीं करने दिया गया।
केवल डॉक्टर ही गए जेल में बाकी स्टाफ को बाहर ही रोका
मॉक ड्रिल के तहत पीजीआई से एक एंबुलेंस में दो डॉक्टर, एक मेल नर्स और एक ईसीजी एक्सपर्ट को सुनारिया जेल भेजा गया। इनमें एंबुलेंस का ड्राइवर, डॉ. संदीप, डॉ. विकास, मेल नर्स अशोक और ईसीजी एक्सपर्ट शामिल थे। जब एंबुलेंस सुनारिया जेल पहुंची तो गहन जांच के बाद केवल डॉ. संदीप और डॉ. विकास को अंदर जाने की अनुमति दी गई बाकी तीनों कर्मचारी जेल के बाहर ही रोक दिए गए। कुछ देर बाद डॉक्टर जेल से बाहर आए और इसके बाद बाबा को जेल से पीजीआई तक लाने की मॉक ड्रिल शुरू हुई।
दस वाहनों का काफिला और पूरा रास्ता सील
गुरमीत को जेल से लाने के लिए किए गए मॉक ड्रिल में उसकी एंबुलेंस के आगे दो पुलिस के वाहन थे और पीछे आठ वाहनों का काफिला था। इसमें पीजीआई एसएचओ के अलावा शिवाजी कॉलोनी एसएचओ और डीएसपी ताहिर हुसैन एवं डॉक्टरों की एक गाड़ी भी काफिले में मौजूद रही। इसके साथ ही एक निजी वाहन भी काफिले में मौजूद था।
छावनी में तब्दील संस्थान
जाट आरक्षण आंदोलन की हिंसा में भी पीजीआई कैंपस की शांति भंग नहीं हुई, लेकिन शनिवार को मॉक ड्रिल से तकरीबन तीन घंटे पहले ही पूरे संस्थान को छावनी में तब्दील कर दिया गया। सबसे पहले फोर्स को सीआरएस ओपीडी में लगाया गया। इसके बाद लाला श्याम लाल भवन और बाद में वार्ड 24 तथा आसपास के एरिया को सुरक्षा चक्र में ले लिया गया। वहीं, दिल्ली रोड से आने वाले वाहनों को डायवर्ट कर दिया गया था। सेक्टर-1 की पुलिया से भी वाहनों को सेक्टरों के रास्ते से निकाला गया। दुकानों के बाहर रखे सामान को भी अंदर करा दिया गया।
सवाल : दुष्कर्मी गुरमीत पर मेहरबान क्यों अफसर
दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म मामले में जेल काट रहे गुरमीत राम रहीम के मॉक ड्रिल को देखकर सवाल उठ रहा है कि पीजीआई में राज्यपाल और मुख्यमंत्री जैसे व्यक्ति आए तो उनकी सुरक्षा के लिए कभी मॉक ड्रिल नहीं किया गया। ऐसे में दुष्कर्मी गुरमीत पर अफसर और सरकार क्यों मेहरबान है। क्या जेल में बंद अन्य कैदियों के लिए इस तरह के अभ्यास किए जाते हैं। वार्ड 24 में भर्ती मरीजों के परिजनों ने भी बताया कि आने-जाने के गेट बंद हैं, इतनी फोर्स तैनात है कि लगता ही नहीं है कि अस्पताल है। इस संबंध में एक मरीज ने मौके पर आए डीएसपी ताहिर हुसैन से इस संबंध में सवाल भी पूछ लिया।
कई जगह थी आने की सूचना, हर कोई अलर्ट
डेरा मुखी को उपचार के लिए संस्थान में लाने की सूचना कई विभागों में थी। सभी जगह स्टाफ नर्स और डॉक्टर अलर्ट पर थे कि कहीं उनके पास ही प्रशासन उसे लेकर न आ जाए। इसके लिए हर वार्ड में उपचार के लिए टीम पूरी तरह से तैयार थी।
यह रूटीन का मॉक ड्रिल था। यह गुरमीत के लिए था या नहीं। यह मुझे नहीं पता। यह आम कैदी और बंदी के लिए भी हो सकता है। मॉक ड्रिल हम समय समय पर करते रहते हैं। जरूरी नहीं है कि गुरमीत के लिए मॉक ड्रिल किया जाए। यह थर्ड पर्सन के लिए भी हो सकता है।
- ताहिर हुसैन, डीएसपी, रोहतक
हमारे लिए सभी मरीज बराबर हैं। जो संस्थान में आएगा, उसे उपचार दिया जाएगा। शनिवार को मॉक ड्रिल के दौरान व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया है और इसके साथ ही सुरक्षा के लिहाज से भी हर स्थिति को देखा गया है। यदि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गुरमीत संस्थान में आता है तो उसे वार्ड 24 में रखा जाएगा। इससे अन्य मरीजों को परेशानी नहीं होगी, क्योंकि यह सबसे अलग स्थान पर है और इसके लिए अलग से गेट है।
- डॉ. राकेश गुप्ता, निदेशक, पीजीआईएमएस