अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। जीआरपी सीआईए की जांच में सामने आया है कि गरीब रथ एक्सप्रेस में वारदात के लिए डकैत रोहतक स्टेशन से कोच नंबर जी-7 और जी-9 में सवार हुए थे। भिवानी रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों में कोई भी संदिग्ध ट्रेन में सवार होते नहीं दिखा है। डकैतों की तलाश में जुटी पुलिस को पीड़ितों से मिले हुलिया और भाषा से माना जा रहा है कि डकैत स्थानीय ही हैं जिन्हें स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे होने की जानकारी थी। वहीं, सीआईए के रडार पर कुछ संदिग्ध बदमाश आ गए हैं, जिनके मोबाइल की डिटेल खंगाली जा रही है। एसपी जीआरपी का कहना है कि अभी तक की जांच से मिले इनपुट के आधार पर माना जा रहा है कि डकैत स्थानीय हैं। जिन्हें न सिर्फ वारदात स्थल से सुरक्षित स्थान की तरफ भागने की जानकारी थी बल्कि स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे होने के भी बारे में पता था।
बता दें कि बुधवार तड़के 2:58 बजे रोहतक स्टेशन से गरीब रथ एक्सप्रेस चंडीगढ़ के लिए रवाना हुई। एलीवेटेड रेलवे ट्रैक का निर्माण होने की वजह से कॉशन लगा होने की वजह से ट्रेन धीमी गति से आईटीआई तक पहुंची। इसके बाद ट्रेन करीब 40 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से चलने लगी। 3:15 बजे ट्रेन मकड़ौली रेलवे क्रासिंग के गेट सी-7 से गुजरी। 100 मीटर चलने के बाद चेन पुलिंग हुई तो सी-7 का गेट मैन जाने लगा तभी करीब एक मिनट में ट्रेन चलने लगी। इस दरमियान कोच जी-7 से दो बदमाश उतरे और कुछ बदमाश कोच जी-9 में सवार हो गए। बमुश्किल 100 मीटर दूर पानीपत-हिसार बाईपास पुल पार होते ही फिर चेन पुलिंग करके ट्रेन को रोक लिया गया। इसके बाद डकैतों ने करीब 18 मिनट तक कोच के अंदर हथियारों के बल पर डकैती डालकर यात्रियों से नकदी व जेवरात लूटे। इसके बाद ट्रेन ने सी-8 क्रासिंग 3:33 बजे पार की।
इस डकैती के खुलासे के लिए जीआरपी और आरपीएफ की टीमें लगी हुई है। टीमें बदमाशों का पता लगाने के लिए हरसंभव स्थान पर सीसीटीवी कैमरे और मोबाइल टावरों को डंप करने में लगी हैं। इसके चलते जीआरपी की एक टीम ने भिवानी रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला, मगर कोई भी संदिग्ध भिवानी स्टेशन पर नजर नहीं आया। सूत्र बताते हैं कि इस ट्रेन के अंदर कोई संदिग्ध व्यक्ति चढ़ता भी नहीं दिखा है। इसके बाद डकैतों की तलाश में जुटी टीम को यकीन हो गया है कि बदमाश रोहतक रेलवे स्टेशन से ही ट्रेन में सवार हुए हालांकि इसके बाबत कोई पुख्ता सबूत हाथ नहीं लगे हैं। टीम का मानना है कि डकैतों को भलीभांति पता था कि रोहतक स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं, जिसकी वजह से उन्होंने इसको ही सुरक्षित स्थान माना। पुलिस के हाथ कुछ बदमाशों के संदिग्ध मोबाइल नंबर भी लगे हैं जिनको सर्विलांस टीम खंगालने में जुटी है। चंडीगढ़ जीआरपी ने पीड़ितों से पूछताछ में मिली जानकारियां डकैतों की तलाश में जुटी टीमों के साथ साझा की हैं।
एसपी जीआरपी धीरज सेतिया ने बताया कि अभी तक की जांच से पता चला है कि बदमाश रोहतक के स्थानीय हैं। कई तथ्य जुटाने के बाद माना जा रहा है कि बदमाश भिवानी से नहीं बल्कि रोहतक स्टेशन से ट्रेन में सवार हुए। इससे जाहिर होता है कि बदमाशों को पता था कि रोहतक स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। यही नहीं, बदमाशों को वारदात स्थल से सुरक्षित भागने के रास्ते की भी भलीभांति से जानकारी थी क्योंकि घने कोहरे में बिना जानकारी के भागना संभव नहीं है।