रोहतक। प्रत्येक रोग को सामान्य श्वसन बीमारी के रूप में पहचानने की आवश्यकता है, जो जीवन की गुणवत्ता, मृत्यु दर और रुग्णता को प्रभावित करती है। रोगों में नवीनतम प्रगति के बारे में चिकित्सकों को भी अपनी विशेषज्ञता बढ़ाते रहना चाहिए। यह बातें पीजीआईएमएस के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की ओर से लेक्चर थियेटर-5 में आयोजित 7वें वार्षिक पीसीसीएम सीएमई सम्मेलन में डॉक्टर ध्रुव चौधरी ने कहे। इस सम्मेलन में दमा और सीओपीडी जैसे छाती के रोगों पर मास्टर क्लास दिया गया। उन्होंने विद्यार्थियों से श्वसन तंत्र के देखभाल के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। मास्टर क्लास में हरियाणा और उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों से 100 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन भाग लिया।