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देश को वैदिक संस्कृति की तरफ लौटने की जरूरत : स्वामी आर्यवेश

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स्वामी इंद्रवेश विद्यापीठ आश्रम टिटौली में आयोजित विरक्त सम्मेलन में उपस्थित आर्य समाज के सन्या
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रोहतक । स्वामी इंद्रवेश विद्यापीठ आश्रम टिटौली में आर्य समाज के सन्यासियों, वानप्रस्थियों व नैष्ठिक ब्रह्मचारियों का वैदिक विरक्त सम्मेलन शुक्रवार को आयोजित किया गया।
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बेटी बचाओ चतुर्वेद पारायण महायज्ञ के 10वें दिन विरक्त सम्मेलन में बोलते हुए स्वामी आर्यवेश ने कहा कि आज देश को दोबारा वैदिक संस्कृति की तरफलौटने की आवश्यकता है। आर्य समाज वैदिक संस्कृति को प्रचारित व प्रसारित करने के लिए लंबे समय से लगा हुआ है। आर्य समाज के पास बलिदान की परंपरा है। वेद जैसा सार्वभौमिक ज्ञान व जीवन शैली है।
उन्होंने कहा कि आज हमें नकारात्मक मानसिकता के लोगों से सावधान रहते हुए निरंतर आगे बढ़ने की योजना बनानी चाहिए। उन्होंने आह्वान किया कि 2024 में स्वामी दयानंद के 200वें जन्मदिवस पर 200 सन्यासी, 200 वानप्रस्थी, 200 जीवनदानी युवा तैयार किए जाए। आर्य समाज के विद्वान आचार्य वेदमित्र ने कहा कि आज देश को तोड़ने वाली ताकतों से सावधान रहने की जरूरत है। युवाओं की हालत सुधारने की योजना पर काम करने की जरूरत है। वेद को मानने वाले व्यक्ति सबको बराबर मानते है, क्योंकि वेद भेदभाव नहीं सिखाता बल्कि सारा विश्व हमारा परिवार की भावना सिखाता है। इसलिए वेदों की ओर लौटें। ज्यादा से ज्यादा युवा वेद की मान्यताओं को प्रचारित करने के लिए आगे आएं।
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वैदिक विरक्त मंडल के संगठन मंत्री स्वामी सोम्यानंद ने कहा कि बुराइयों के विरुद्ध बगावत का नाम ही आर्य समाज है। देश की आजादी के आंदोलन में भी आर्य समाज ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की, जिसका परिणाम स्वतंत्रता के रूप में देखने को मिला। स्वामी इंद्रवेश विद्यापीठ आश्रम टिटौली में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा 12 मार्च को मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इस अवसर पर महर्षि दयानंद सरस्वती के 200वें जन्म जयंती वर्ष पर हरियाणा प्रांत के आगामी दो वर्षों के भव्य कार्यक्रमों का शुभारंभ किया जाएगा।
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