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सफेद मक्खी के प्रकोप से खराब हो रही कपास की फसलें

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खेतो का निरीक्षण करते किसान और ‌कृषि विभाग के अधिकारी। अमर उजाला
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रोहतक। सफेद मक्खी फसलों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। सांपला खंड के किसानों के लिए सफेद मक्खी की समस्या चिंता का विषय बनी हुई है। खंड में करीब 1200 एकड़ में कपास की फसल का उत्पादन किया जा रहा है। इसमें से करीब 500 एकड़ फसल सफेद मक्खी रोग की चपेट में आई हुई है। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार रोग आरंभिक अवस्था में है जिसे रोग का आर्थिक आधार कहा जाता है।
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बुधवार को नयाबांस गांव के खेतों में कृषि विभाग के अधिकारियों की टीम ने पहुंचकर फसल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि पिछले 15 दिनों से खेत में कहीं-कहीं कपास के पौधे सूखने लगे हैं। फसलों की वृद्धि रुकी हुई है। निरीक्षण करने वाली टीम ने बताया कि अभी रोग से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन किसानों को सतर्कता के साथ रोकथाम के तरीके अपनाने होंगे।
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ग्रामीण बोले- सफेद मक्खियों ने बहुत नुकसान किया
तीन एकड़ में कपास की फसल उगा रखी है। करीब तीन महीने से बहुत ज्यादा मेहनत कर फसल को तैयार किया है। अब फसल पर फल आने का समय हुआ है लेकिन अब कुछ दिन से सफेद मक्खियों ने बहुत नुकसान कर दिया।
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- रामनिवास, किसान
पिछले 15 दिनों से खेत में कहीं-कहीं पौधे सूखे हुए मिल रहे हैं। इसका कारण सफेद मक्खी बताया जा रहा है। इस रोग की वजह से फसल की वृद्धि रुकी हुई है।
- हरिप्रकाश, किसान
पिछले वर्ष कपास की फसल में गुलाबी सुंडी व बारिश के कारण नुकसान हो गया था। इस बार कपास की फसल में फल आना शुरू हुआ था। लेकिन अब सफेद मक्खी के प्रकोप से बहुत नुकसान हो रहा है। प्रत्येक पत्ते पर 10-12 कीट मिल रहे हैं।
- मांगेराम, किसान
ऐसे करें रोकथाम
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सफेद मक्खी के प्रबंधन के लिए पाईरीप्रोक्सिफेन (डायटा) 10 ई सी की 400 मिलीलीटर मात्रा प्रति 200 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें व आवश्यकता पड़ने पर दूसरा छिड़काव 12-15 दिनों के बाद स्पिरोमेसिफेन (ओबेरॉन) 240 एस सी की 240 मिलीलीटर मात्रा प्रति 200 लीटर पानी प्रति एकड़ की दर से करें। बारिश के मौसम में स्प्रे के घोल में चिपचिपा पदार्थ जैसे सेण्डवित, सेलवेट 99 या टीपोल की 60 मिलीलीटर मात्रा प्रति 200 लीटर घोल मिलाएं।
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वैज्ञानिक भाषा में सफेद मक्खी पौधों से रस चूसने वाला एक कीट है। यह बहुभक्षी कीट है। इस सूक्ष्म कीट का आकार करीब आधा मिलीमीटर होता है व इसके पंख सफेद होते हैं। आर्थिक आधार का मतलब होता है एक पत्ते पर कीट की संख्या नौ या उससे कम होना। क्षेत्र में अभी यह रोग आर्थिक आधार की स्थिति में है। किसान कीटनाशक की मदद से रोग की रोकथाम कर सकते हैं।
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- रोहित वत्स, खंड कृषि अधिकारी, सांपला
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