छोटे बच्चों और किशोरों के शरीर में मौजूद एंजियोटेंसिन परिवर्तित एंजाइम (एसीई) ही उन्हें कोरोना से बचा रहा है। कम आयु के बच्चों में मौजूद एसीई पर कोरोना वायरस के चिपकने की क्षमता ना के बराबर होती है, इसलिए संक्रमण इस आयु वर्ग पर अपना प्रभाव नहीं दिखा पा रहा है।
उम्र बढ़ने के साथ-साथ किशोरों में मौजूद एसीई पर वायरस के चिपकने की क्षमता धीरे-धीरे बढ़ती है, लेकिन इस वर्ग की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने के कारण वायरस अपना अधिक प्रभाव नहीं डाल पाता। इन दोनों वर्ग में सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें वायरस का असर तो नहीं आता, लेकिन यह वर्ग संक्रमण के दौरान दूसरों को संक्रमित जरूर कर सकते हैं।
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पीजीआईएमएस के प्रोफेसर एवं कोवैक्सीन के सह-अनुसंधानकर्ता डॉ. रमेश वर्मा बताते हैं कि कोरोना वायरस अधिकांश नाक-मुंह से शरीर में प्रवेश करता है और फेफड़ों तक पहुंचता है। बच्चों में यह वायरस चिपक नहीं पाता। बड़ों में चिपक जाता है और शरीर को नुकसान पहुंचाता है। यह रक्तवाहिकाओं में मिल कर शरीर के विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंचाता है। बच्चों में तो यह वायरस नुकसान नहीं पहुंचा पाता लेकिन बच्चों के जरिए दूसरों को संक्रमित कर सकता है।
नौ साल तक की उम्र के बच्चे में यह वायरस समस्या नहीं करता। इसके बाद 18 साल तक के बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। इसके चलते वायरस का इन पर अधिक असर नहीं होता, लेकिन यह भी संक्रमण को फैला सकते हैं। हालांकि बीमार रहने वाले बच्चों व किशोरों में इसके गंभीर परिणाम आने का खतरा बना रहता है। गौरतलब है कि पीजीआईएमएस 12 साल के आयु तक के बच्चे को कोवैक्सीन की रिसर्च में वैक्सीन की डोज दे चुका है। लेकिन उपलब्ध होने वाली वैक्सीन फिलहाल 18 व उससे अधिक आयु वर्ग को दी जाएगी।
करीब 23 हजार वॉलंटियरों को लगाई जा चुकी वैक्सीन
कोवैक्सीन की रिसर्च के तीसरे चरण में 25800 वॉलंटियरों को यह वैक्सीन दी जानी थी। अभी तक करीब 23 हजार वॉलंटियरों को यह वैक्सीन दी जा चुकी है। बात पीजीआईएमएस की करें तो यहां 438 को तीसरे फेज के ट्रायल में शामिल किया जा चुका है।
अभी कोरोना की वैक्सीन 18 साल व इससे अधिक आयु वालों के लिए आई है। पहले यह वैक्सीन हेल्थ वर्करों फिर बुजुर्गों, बीमारों व फ्रंटलाइन हेल्थ वर्करों को दी जाएगी। बच्चों व किशोरों के लिए अभी सावधानी की जरूरत है। दोनों के टीकाकरण के लिए और रिसर्च होगी। इस समय तक बच्चों व किशोरों को सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे। कोरोना से बचाव के लिए जरूरी है कि सभी में अपने आप इम्यूनिटी बने या टीकाकरण से इम्यूनिटी बनाई जाए। फिलहाल टीकाकरण का उद्देश्य संक्रमण से बचाना है, यह टीका कितने समय सुरक्षित रखेगा इस पर रिसर्च जारी है। - डॉ. ध्रुव चौधरी, सीनियर प्रोफेसर पीसीसीएम व प्रदेश प्रमुख नोडल अधिकारी कोविड एवं कोवैक्सीन रिसर्च के को इन्वेस्टिगेटर, पीजीआईएमएस