गर्मी का सीजन शुरू होते ही ठंडे पानी की जरूरत महसूस होने लगती है। एक तरफ लोग जहां फ्रिज का पानी पीते हैं, वहीं अधिकतर लोग प्राकृतिक फ्रिज यानी मिट्टी के मटके का पानी पीना पसंद कर रहे हैं। हर साल नए-नए डिजाइन के मिट्टी के मटके बाजारों में सज जाते हैं। इस वर्ष भी एक से बढ़कर एक मटके बाजार में उपलब्ध हैं।
इसमें सबसे ज्यादा खरीदारी गुजराती मटके की हो रही है। इसके साथ-साथ राजस्थानी मटका भी खूब बिक रहा है। झज्जर मटका अपनी कम कीमत के कारण डिमांड में है। देसी लोग इसी मटके को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
पांच से 20 लीटर की क्षमता वाले गुजराती मटके देखने में काफी आकर्षक हैं। इस पर की गई मनोहर चित्रकारी लोगों को खूब भा रही है। मटका व्यापारियों ने बताया कि मटके की बिक्री खासकर मई और जून में होती है। इसके बाद बारिश का दौर शुरू हो जाता है। नए डिजाइन के मटके लोगों की पहली पसंद है। टोंटी लगे मटके का मूल्य सामान्य मटके से 100 रुपये अधिक है।
अहमदाबाद और अलवर से आ रहे मटके
डी पार्क में हर सीजन मटका का व्यापार करने वाले व्यापारी राजीव कत्याल ने बताया कि ज्यादातर मटके अहमदाबाद (गुजरात) व अलवर (राजस्थान) से आ रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा बिक्री अहमदाबादी मटकों की हो रही है। लोग इसके आकार पर मोहित हो रहे हैं।
इन मटकों की है डिमांड, देखें दाम
झज्जर मटका 50 से 250
गुजराती मटका 150 से 500
राजस्थानी मटका 100 से 500
यूं करता है मटका जल शीतल
मटके मिट्टी से बनाए जाते हैं। इसके कारण इसमें कई सूक्ष्म छेद होते हैं, जिनसे गर्मी के दिनों में लगातार पानी वाष्प बनकर उड़ता रहता है। इससे कारण मटके का जल शीतल रहता है।
पेट संबंधित नहीं होती हैं समस्याएं
नागरिक अस्पताल के चिकित्सक डॉ. रोहित कपूर ने बताया कि मटके का पानी फ्रीज के पानी से ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक होने का करण यह है कि मटके की कूलिंग प्रक्रिया पूरी तरह से प्राकृतिक है। साथ ही मिट्टी खुद में एक प्राकृतिक पदार्थ है। यही कारण है मटके का जल ग्रहण करने से गैस बनना, कब्ज की शिकायत व एसिडिटी संबंधित समस्याएं नहीं होती है। मटके के पानी का नियमित सेवन करने से पेट की बीमारियां छूमंतर हो जाती हैं।