आनंद कुमार मिश्रा
रोहतक। लगातार बढ़ रही ठंड ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ओपीडी ही नहीं, आपातकालीन विभाग में बुखार, खांसी-जुकाम के मरीजों संख्या एकाएक बढ़ गई है। इनमें से ज्यादातर को नेबुलाइज करना पड़ रहा है। कम वजनी व समय से पूर्व जन्मे बच्चों को इस मौसम में खतरा अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में उन्हें सुरक्षित रखना जरूरी है। सामान्य दिनों में मुश्किल से करीब 100 मरीज रोज आते थे। अब यह संख्या 200 के करीब पहुंच गई है। ज्यादातर मरीज सांस रोग से संबंधित हैं। इन्हें नेबुलाइजर व अन्य जरूरी दवा देकर राहत पहुंचाई जा रही है।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान (पीजीआईएमएस) व सिविल अस्पताल में ठंड ने मरीजों की संख्या बढ़ा दी है। सामान्य बुखार, खांसी, जुकाम, वायरल के अलावा निमोनिया के मरीज सामान्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा आ रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में अस्थमा व सांस के मरीज हैं। हालात यह हैं कि पीजीआईएमएस के आपातकालीन विभाग में विभिन्न रोगों के रोजाना करीब 400 मरीज आ रहे हैं। इनमें से करीब आधे सांस से पीड़ित हैं। इन्हें राहत के लिए नेबुलाइज करना पड़ रहा है। ऐसे में आपातकालीन विभाग का तीन नंबर कमरा मरीजों से अटा पड़ा है। बेड पर जगह नहीं होने के कारण मरीजों को स्ट्रेचर पर नेबुलाइज करना पड़ रहा है।
बच्चों को ऐसे बचाएं ठंड से
डॉक्टरों का कहना है कि कोल्ड स्ट्रोक का खतरा यहां कम है। ऐसे मामले बर्फीले क्षेत्रों से ज्यादा आते हैं। शिशुओं को थोड़ा खतरा रहता है। खासकर जिनका वजन 2.5 किलो से कम या समय पूर्व जन्म लेने वाले बच्चे इसमें शामिल हैं। शिशु के सिर, पांव, हाथ ढककर रखना जरूरी है। ऐसे मौसम में दो-तीन या अधिक कपड़े भी पहनाने पड़े तो परहेज नहीं करना चाहिए। छोटे बच्चों के कपड़े गीले न होने दें। यूरीन के बाद कपड़े तुरंत बदलें।
वर्जन
ठंड में सांस के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति, मरीज व बच्चे इसकी चपेट में ज्यादा आते हैं। समय से पहले और ढाई किलो कम के वजन के बच्चों को इस मौसम में समस्या आ सकती है। ऊनी कपड़े से अच्छी तरह सिर, पैर और अन्य अंग ठीक से ढककर रखना चाहिए।
- डॉ. कुलप्रतिभा, फिजिशयन, सामान्य अस्पताल।
वर्जन
ठंड के इन दिनों में बुजुर्ग और बच्चों को सांस संबंधित समस्याएं आ जाती हैं। धूम्रपान करने वाले लोग सबसे ज्यादा सांस के रोग से ग्रसित रहते हैं। मरीज की बीमारी के अनुसार दवा दी जा रही है। मरीजों को नेबुलाइजर, भाप और गंभीर मरीज को वेंटिलेटर पर रखा जाता है।
- डॉ. प्रियंका, डीएमएस, आपातकालीन विभाग, पीजीआईएमएस।
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सांस के मरीज यह बरतें सावधानी
-धूम्रपान न करें, प्रदूषण से बचाव के लिए एन-95 मास्क लगाएं। घर की साफ-सफाई का ध्यान रखें। सैर और योग करें। तेलीय भोजन खाने से बचें, समय पर दवाई लें। गर्म पानी से भाप लें।
सांस के मरीज के लक्षण
छोटी सांस, घरघराहट, लगातार खांसी आना, छाती क्षेत्र में जमाव, पैर की उंगलियों में सूजन, खराश और सूजन के कारण गले में दर्द और आवाज में बदलाव आना।