कलानौर। कस्बे के नागरिक अस्पताल में पिछले दो साल से एक्स-रे मशीन खराब पड़ी है। इसी जर्जर मशीन से किसी तरह काम लिया जा रहा है। पिछले दो साल से इसकी मरम्मत कराने या इसे दुरुस्त कराने की ओर किसी का ध्यान नहीं गया है।
मरीजों को इलाज से पहले जांच के लिए निजी जांच केंद्रों की शरण लेनी पड़ रही है। अस्पताल में हर सुविधा होने का दावा करने वाले अधिकारी भी जनता की इस समस्या से अनजान हैं। स्वास्थ्य विभाग या अधिकारियों ने पिछले दो वर्ष से खराब पड़ी इस मशीन की सुध नहीं ली है। यही नहीं, इसकी क्षमता भी समाप्त हो चुकी है। इस कारण मरीज परेशान हैं।
अस्पताल की एक्स-रे मशीन काफी पुरानी हो चुकी है। इससे खड़े व्यक्ति का एक्स-रे नहीं हो पा रहा है। किसी तरह लेटे हुए व्यक्ति का एक्स-रे किया जा रहा है। इस जर्जर हाल मशीन की अरसे से न जांच हुई है न इसे दुरुस्त करने का प्रयास। मरीज पर ठीक प्रकार से रेडिएशन काम कर रही है या नहीं। कंप्यूटर की मदद से एक्स-रे फिल्म साफ की जा रही है। जिस कंपनी से इसे खरीदा गया है, उसके साथ समझौता भी खत्म हो चुका है। एक्स-रे करते समय मशीन को थोड़ा सा भी टेढ़ा करने पर मशीन से तेल निकलना शुरू हो जाता है।
मशीन से निकलने वाली किरणों का स्वास्थ्य पर पड़ने वाला असर जानने के बाद ही विशेषज्ञ इसे चलाने की अनुमति देता है। अस्पताल इस मशीन की यह जांच होना बाकी है। बीआरसी के नियमानुसार एक्स-रे मशीन की उम्र 10 वर्ष से 15 वर्ष होती है। यह समय बीतने के बाद एक्सपर्ट ही स्पष्ट करता है कि मशीन इस्तेमाल करने लायक है या नहीं। एक्स-रे करते समय मशीन कितनी फ्रीक्वेंसी छोड़ती है, इससे मरीज व एक्सरे करने वाले रेडियोग्राफर के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ रहा है, इसकी भी कोई नहीं जानकारी नहीं है। धड़ल्ले से चला रहे बिना अनुमति के एक्स-रे मशीन
कलानौर क्षेत्र में निजी अस्पतालों की बात की जाए तो बिना अनुमति के नियम व शर्तों को ताक पर रखकर झोलाछाप एक्सरे कर रहे हैं। बीआरसी के नियमानुसार एक्स-रे मशीन नहीं रखी जा रही हैं। इसके लिए कंक्रीट की मोटी दीवार या मेटल लगा होना चाहिए। जबकि ऐसा कहीं कुछ नहीं है। मशीन पंजीकृत रेडियोग्राफर ही संचालित कर सकता है। उसे छोड़ी जाने वाली रेडिएशन फ्रीक्वेंसी की भी जानकारी होना जरूरी है।
वर्जन
मशीन की कोई वैलिडिटी नहीं होती। जब तक चल रही है, बेहतर है। बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के अनुसार मशीन रिपेयर हो सकती है। नई मशीन की डिमांड भेजी गई है। डिमांड के अनुसार जल्द ही कलानौर नागरिक अस्पताल को नई मशीन मिलेगी।
-डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन।
हाथ व सीने में दर्द रहता है। डॉक्टर ने एक्स-रे कराने के लिए बोला था। लेटने पर पांव का एक्स-रे हो गया, लेकिन खड़े होकर सीने का एक्स-रे नहीं हो पाया। निजी केंद्र से एक्स-रे कराना पड़ा।
पुष्पा, कलानौर।
पैर और कमर में दर्द रहता है। डॉक्टर को दिखाने सरकारी अस्पताल गई थी। यहां डॉक्टर ने एक्स-रे कराने के लिए कहा। एक्स-रे कराने गए तो एक एक्स-रे हुआ, लेकिन एक नहीं हो पाया। इसके लिए साफ इनकार कर दिया।
रेनू, कलानौर।