रोहतक। त्योहारी सीजन में साइबर ठग सक्रिय हो गए हैं। शहर के जूता व्यापारी, डीजल इंजन कारोबारी व बिल्डिंग मैटीरियल सप्लायर को जाल में फंसाकर ठगों ने 36 लाख 27 हजार रुपये ठग लिए। इस संबंध में साइबर क्राइम थाने में अलग-अलग ठगी के केस किए गए हैं।
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केस-1 : जूता व्यापारी से शेयर बाजार में ठगी के नाम पर 15.18 लाख ठगे
चिन्योट कॉलोनी निवासी गंधर्व कोचर ने दी शिकायत में बताया कि वह जूतों की कंपनी में दिल्ली काम करता है। साथ ही शेयर बाजार में निवेश को लेकर वीडियो देखता रहता है। वह इसी दौरान एक व्हाट्स एप ग्रुप से जुड़ गया। ग्रुप में शेयर बाजार में निवेश के बारे में बताया जाता था, कैसे ज्यादा मुनाफा कमाएं। 3 अगस्त को उसने कहने पर एक एप डाउनलोड कर ली। फिर बताए अनुसार एप पर रजिस्ट्रेशन करवाया। उसके बाद मैसेज आने लगे। इस तरह निवेश के नाम पर उससे तीन बैंक अकाउंट से 16 लाख 13 हजार रुपये निवेश करवा दिए। हालांकि एक बार 40 हजार व दूसरी बार 55 हजार रुपये वापस भी आए। इसके बाद पता चला कि उसके साथ फर्जीवाड़ा हुआ है। उसके 15 लाख 18 हजार रुपये ठग लिए गए।
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केस - 2 : झज्जर रोड के डीजल इंजन कारोबारी से 5.25 लाख रुपये ठगे
पुलिस के मुताबिक, डीएलएफ कॉलोनी निवासी राजेश गुप्ता ने दी शिकायत में बताया कि उसका डीजल इंजन का कारोबार है। झज्जर रोड पर दुकान कर रखी है। वह मोबाइल फोन पर फेसबुक पर आने वाली शेयर बाजार में निवेश की वीडियो देखता रहा है। 23 अगस्त को उसे एक व्हाट्स एप ग्रुप से जोड़ा गया। ग्रुप में काफी लोग शेयर बाजार में निवेश को लेकर सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहे थे। उसने भी एक नंबर पर चैटिंग की। उसे एक लिंक भेजा गया, जिस पर क्लिक करते ही एक एप डाउनलोड हो गया। उसने आईडी बनाई। इसके बाद उससे पहले 25 हजार रुपये निवेश करवाया गया। इसके बाद उसके खाते में मुनाफा दिखाया गया। फिर और पैसे मांगे गए। इस तरह उससे 5 लाख 25 हजार रुपये ठग लिए गए। बाद में पता चला कि फर्जी व्हाट्स एप व एप के माध्यम से फर्जीवाड़ा किया गया है।
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केस -3 : फ्रेंचाइजी का झांसा देकर ठगे 15 लाख 83 हजार रुपये
नेहरू कॉलोनी निवासी नरेश कुमार ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दी है कि वह बिल्डिंग मैटीरियल सप्लायर के तौर पर काम करता है। उसने निजी बैंक में अपनी पत्नी के नाम से खाता खुलवा रखा है। उसने अपनी पत्नी के नाम से सितंबर में गूगल पर एक कंपनी की फ्रेंचाइजी लेने के लिए सर्च किया था। उसे एक लिंक मिला। उसके ऊपर क्लिक किया तो उसकी ई-मेल आईडी, फर्म का नाम, मोबाइल नंबर व लोकेशन मांगी गई। उसने दिए गए फार्म में पूरी डिटेल भर दी। उसके मोबाइल नंबर पर कॉल आई और कॉल करने वाले ने खुद को कंपनी का कर्मचारी बताया। कहा कि आपको एक ई-मेल भेजेंगे। उसे भरकर भेज देना। 24 सितंबर को ई-मेल आई, जिसे उसने भरकर और अपनी पत्नी का आधार कार्ड, पेन कार्ड, जीएसटी नंबर, ई-मेल आईडी व अन्य जानकारी भेज दी। 30 सितंबर को उसे ई-मेल से मंजूरी पत्र आ गया। उससे रजिस्ट्रेशन के नाम पर 49 हजार 560 रुपये जमा करवाए गए। इसके बाद किसी न किसी बहाने 15 लाख 83 हजार रुपये जमा करवा लिए। बाद में पता चला कि उसके साथ फर्जीवाड़ा हुआ है।