रोहतक। बदलती जीवनशैली व खान पान लोगों को मोटापे का शिकार बना रहा है। मेहनत के बजाय आराम पसंद जीवन भी मोटापे की वजह बन रहा है। भावी पीढ़ी चुस्त दुरुस्त होने के बजाय आलसी व भारी शरीर वाली बन रही है। ऐसे में कम उम्र में ही हृदय व अन्य गंभीर रोग घेरने लगे हैं। इन सबका असर लिवर पर पड़ रहा है। इस कारण लिवर संबंधी समस्या बढ़ने लगी है। डॉक्टर इस स्थिति से बचने के लिए घी, मक्खन, चीनी, मैदा आदि के सेवन से परहेज बरतने की सलाह दे रहे हैं।
मोटापा बीपी, शुगर, थायराइड व तमाम रोगों का भी कारण है। पीजीआई के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग में हर रोज ऐसे करीब आठ से दस केस सामने आ रहे हैं। इसमें हर उम्र के लोग शामिल हैं। यह चिंता का विषय है।
मोटे अनाज का करें प्रयोग
चिकित्सकों का कहना है कि गेहूं शुगर की बड़ी वजह है। शुगर मरीजों को गेहूं के सेवन से बचने की जरूरत है। साथ ही हमें मोटे अनाज की ओर लौटना होगा। दिन में दो से तीन बार गुनगुना पानी जरूर पीएं। यह पाचन तंत्र मजबूत बनाता है। ठंडा पानी पीने से पाचन तंत्र बिगड़ता है। लिवर पर दबाव का दवा के जरिए इलाज संभव है। इसलिए समय रहते जांच कराकर इलाज जरूर लें।
व्यायाम से दूरी बना रहे हम
सुविधा भोगी समाज अपनी सेहत का खुद दुश्मन बनता जा रहा है। आराम पसंद जीवन व सुविधाओं के चलते शारीरिक गतिविधियां न के बराबर हो गई हैं। हम व्यायाम से भी दूरी बनाए हुए हैं। भावी पीढ़ी घर से स्कूल तक पैदल या साइकिल पर न जाकर बस से आती-जाती हैं। मैदान में पसीना बहाने के बजाय बच्चे घर में टीवी व मोबाइल की स्क्रीन पर नजरें जमाए रहते हैं। इस कारण बच्चे मोटापे के शिकार बनते जा रहे हैं।
वर्जन:
बदलता खानपान व बढ़ती सुविधाओं में आरामपरक जीवन मोटापे की बड़ी वजह है। इससे बचने के लिए व्यायाम जरूरी है। गेहूं की जगह मोटा अनाज खानपान में शामिल करना चाहिए।
-डाॅ. प्रवीण मल्होत्रा, विभागाध्यक्ष, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, पीजीआईएमएस।