चंद्रयान-3 का सफल प्रक्षेपण व लैंडिंग ने रोहतक को भी चार चांद लगा दिए हैं। रोहतक के सूक्ष्म व अहम कलपुर्जे चांद पर रखे जाने वाले कदम को सुगम बनाया। इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को रोहतक से 60 लाख फास्टनर्स (विभिन्न प्रकार के नट बोल्ट) भेजे गए थे।
इनकी शानदार तकनीक की बदौलत चंद्रयान-3 अंतरिक्ष को चीर कर चंद्रमा पर पहुंचा। चंद्रयान-3 को लेकर अमर उजला ने इसरो को फास्टनर्स भेजने वाली एरो फास्टनर्स कंपनी के प्रबंध निदेशक जसमेर लाठर से बातचीत की तो ये बातें सामने आई।
इसरो का चंद्रयान-3 चांद पर उतर चुका है। चंद्रयान-3 की सफल लांचिंग के साथ अब सफल लैंडिंग से रोहतक का नाम भी और ऊंचा हो गया। इसकी वजह चंद्रयान में लगे यहां के कलपुर्जे हैं। चंद्रयान की चांद पर सुरक्षित लैंडिंग को लेकर ये कलपुर्जे खास तौर पर तैयार किए गए थे।
इन्हें इस तकनीक से तैयार किया गया है कि ये जितने मजबूत हैं, उतने ही हल्के भी हैं। ये भारीभरक रॉकेट को अंतरिक्ष में लेने के बाद स्वत: चंद्रयान-3 से एक के बाद एक तीन स्तरों पर अलग होते गए। अब अंतिम चरण में चंद्रयान-3 भी चंद्रमा की स्तह पर पहुंच गया है।
एक एमएम के छोटे-छोटे 60 लाख नट से तैयार हुआ लांचर
चंद्रयान-3 को चंद्रमा तक ले जाने के लिए इसरो ने विशेष लांचर तैयार किया। इसे हल्का व मजबूत बनाने पर खास ध्यान दिया गया। इसके चलते बड़े व भारी नटों के बजाय एक एमएम वाले 60 लाख कलपुर्जे प्रयोग किए गए थे। यह छोटे नट न केवल हल्के हैं, बल्कि बेहद मजबूत भी हैं। इसी से पूरा सिस्टम तैयार किया।