रोहतक। पारिवारिक जीवन की विसंगतियों पर व्यंग्यात्मक प्रहार करते हुए दांपत्य जीवन की चुनौतियों के सच को उजागर करते हुए चाहतों की नैतिकता-अनैतिकता को इंगित किया गया। शुक्रवार को महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में रंग महोत्सव के तहत रंग रास थिएटर इवेंट में आंख मिचौली नाटक के हुए मंचन में यह सब देखने को मिला। इसमें कुलपति प्रो. राजबीर सिंह बतौर मुख्यातिथि उपस्थित रहे। प्रतिष्ठित लेखक सीपी देशपांडे की ओर से लिखित नाटक आंख मिचौली का निर्देशन प्रतिष्ठित नाट्यकर्मी सोनू रोंझिंया ने किया। रंग शिल्प थिएटर ग्रुप, रोहतक की इस हास्य-व्यंगात्मक नाट्य प्रस्तुति में अरुण शर्मा, सिमरन, सुजाता रोहिल्ला तथा अरुण नारा ने प्रभावी भूमिका निभाई।
दो युवा युगलों की कहानी आंख-मिचौली ने दांपत्य जीवन में नैतिक जीवन शैली तथा आपसी विश्वास के सार्थक संदेश को मुखरित किया। चुटीले संवाद, जीवंत अभिनय, ध्वनि-प्रकाश के खूबसूरत इस्तेमाल ने नाटक को यादगार बना दिया। रंग रास के संयोजक प्रो. हरीश कुमार ने नाटक की पृष्ठभूमि तथा नाट्य ग्रुप की जानकारी दी। उन्होंने स्वागत भाषण दिया। रोहतक में थिएटर परंपरा को सुदृढ़ करने में रंग-रास को महत्वपूर्ण पहल बताया। कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि परफॉर्मिंग आर्ट्स में नाटक एक प्रभावी संचार माध्यम है, जिसके जरिए प्रभावी सामाजिक संदेश दिया जा सकता है। नाट्य परंपरा भारत में प्राचीन काल से है। रंग रास थिएटर उत्सव आयोजन का उद्देश्य विश्वविद्यालय समुदाय में परफार्मिंग आर्ट्स को लोकप्रिय बनाना तथा विद्यार्थियों को अपने थिएटर तथा अभिनय कला के प्रदर्शन के लिए मंच प्रदान करना है। मंच संचालन निदेशक जनसंपर्क सुनित मुखर्जी ने किया। सहायक निदेशक युवा कल्याण डॉ. प्रताप राठी ने आयोजन सहयोग दिया। इस अवसर पर प्रो. सुरेन्द्र कुमार, प्रो. बलवीर आचार्य, रंग बहार संयोजिका प्रो. विनीता हुड्डा, रंग कलम संयोजिका डॉ. सुनीता सैनी, रंग व्यंजन संयोजक प्रो. आशीष दहिया आदि रहे।