कार्यक्रम में वक्ताओं के विचार सुनते किसान। संवाद
सांपला। खेत में फसल का अवशेष जलाने से पर्यावरण प्रदूषण के साथ-साथ जमीन की उपजाऊ शक्ति भी नष्ट होती है। यह कार्य जीव-जंतुओं के साथ जमीन की सेहत को भी खराब करता है। इसलिए किसानों को अवशेष का प्रबंधन करना चाहिए। यह जानकारी अमर उजाला के किसान चौपाल कार्यक्रम में जिला कृषि उपनिदेशक डॉ. करमचंद ने दी। वह वीरवार को भैसरू खुर्द गांव में किसान चौपाल कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि किसानों को जागरूक करने अपनी टीम के साथ पहुंचे थे। उन्होंने किसानों को बताया कि पराली जलाना बंद करना होगा और अन्य किसानों को भी रोकना होगा। जागरूकता कार्यक्रम में बताया गया कि पराली न जला कर उसका उपयोग हम कैसे कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों में आग लगने से तीन वर्ष की मेहनत खराब हो जाती है। क्योंकि पराली एक प्राकृतिक संसाधन है जो मिट्टी को उपजाऊ बनाने में सहयोग करती है।
वहीं डॉ. राकेश कुमार ने किसानों को बताया कि पराली प्रबंधन को लेकर सरकार की तरफ से किसानों को अनुदान भी दिया जाता है। इसके लिए उन्हें पंजीकरण करना होगा। एडीओ रोहित वत्स ने बताया कि किसान पुरानी तकनीक को छोड़कर अब वैज्ञानिक तरीके से खेती करें और लाभ उठाएं। आज पराली से भी हम अपनी आय बढ़ा सकते हैं। किसानों ने सरपंच पुनीत कुमार के नेतृत्व में पराली न जलाने की भी शपथ ली। कार्यक्रम में लगभग 60 किसानों ने भाग लिया।
इस मौके पर दयानंद, रमेश, सुरेश, अनिल, प्रमोद, नान्हा, अमरजीत, कर्मजीत, सुरेंद्र, कर्मवीर आदि मौजूद रहे।