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Rohtak News: सड़क हादसों पर अंकुश लगाने पर हुआ मंथन

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रोहतक।
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प्रदेश की सड़कों पर होने वाले हादसे हर डेढ़ घंटे में एक जिंदगी निगल जाती है। दिन भर में यह संख्या करीब 14 हो जाती है। यह गंभीर और चिंतिनीय स्थिति है। सड़क हादसों में मरने वालों में 15 से 64 वर्ष के बीच के 78 प्रतिशत लोग होते हैं। यही लोग अपने घर की जिम्मेदारी संभालने के साथ देश की जीडीपी पर असर डालते हैं। यह बात रोड सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन की ओर से सर्किट हाउस में आयोजित कार्यशाला में सामने आई।
यहां पुलिस महानिरीक्षक राकेश आर्य की देखरेख में पुलिस अधिकारियाें को बेहतर यातायात व्यवस्था बनाने का पाठ पढ़ाया गया। इसके लिए ऑस्ट्रेलिया से विशेष तौर पर विशेषज्ञ बुलाए गए। इन्होंने देश व प्रदेश के सड़क हादसों से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत करते हुए पुलिस के जवनों को काम करने की जानकारी दी।
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कार्यशाला में आस्ट्रेलिया के पूर्व पुलिस कमिश्नर डेनिस वॉटसन ने अपने 44 वर्षों के अनुभव साझा करते हुए प्रादेशिक और अंतरराष्ट्रीय सड़क दुर्घटना संख्याओं के बारे में जानकारी प्रदान की। उन्होंने सड़क सुरक्षा में सुरक्षित प्रणाली दृष्टिकोण और रफ्तार कम करने के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करना सभी विभागों और जनसामान्य की साझा जिम्मेदारी है। कार्यशाला में रोहतक, झज्जर, भिवानी और चरखी दादरी के एएसपी और डीएसपी भी उपस्थित रहे। इसके अलावा, ग्लोबल रोड सेफ्टी पार्टनरशिप से किम बेन लुआ, डब्लयूआरआई से अद्वैत, आशिमा, अवतार, भारत, वैष्णवी और श्रेया ने अपने अनुभव रखे। वीरवार को वर्कशॉप का उद्घाटन आईजी राकेश आर्य ने किया। उन्होंने कार्यशाला की सराहना करते हुए सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में जागरूकता फैलाने के लिए इस तरह के प्रोत्साहन पर जोर दिया।
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