झज्जर। सिविल अस्पताल में सात साल से रखी ब्लड कंपोनेंट मशीन को चालू करने के लिए लाइसेंस का इंतजार है। अस्पताल के ब्लड बैंक में मशीनों को इंस्टाल किया जा चुका है। केंद्रीय टीम भी निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट दे चुकी है लेकिन अभी तक लाइसेंस नहीं मिला है। इस कारण यह मशीन अभी तक शुरू नहीं हुई है और मरीज इसका लाभ उठाने से दूर हैं।
स्वास्थ्य विभाग के पंचकूला मुख्यालय ने कई नागरिक अस्पतालों को ब्लड कंपोनेंट की मशीनें भेजी थी ताकि इसका इस्तेमाल रोगी सेवा में किया जा सके। झज्जर में भी यह मशीन वर्ष 2017 में आई थी, लेकिन जब तक जगह की कमी के कारण यह इंस्टाल ही नहीं हो पाई थी। पांच साल तक यह डिब्बे में पैक रखी रही। 2023 में ही अस्पताल में कमरों की व्यवस्था की गई और मशीनों को इंस्टाल कराया गया। उसके बाद केंद्रीय टीम भी निरीक्षण कर चुकी है ताकि लाइसेंस सके लेकिन अभी तक लाइसेंस नहीं मिला है। इस कारण इस मशीन का मरीजों को अभी तक कोई लाभ नहीं मिला है।
कंपोनेंट मशीन से यह मिलेंगी सुविधाएं
बीसीएस मशीन के लग जाने से प्लाज्मा, प्लेटलेट्स, पीआरबीसी, करयोप्रिसिपेट ब्लड संग्रह करने में सुविधा होगी। प्लाज्मा से बर्न, प्लेटलेट्स से डेंगू, पीआरबीसी से एनीमिया, करयोप्रिसिपेट से ब्लीडिंग कंट्रोल के मरीजों को ब्लड की जरूरत होती है। इस मशीन के लगने से एक ही ब्लड को चार तरह से उपयोग में लिया जा सकता है। सेपरेटर मशीन के लग जाने से ब्लड ट्रांसफॉर्मेशनल के क्रम में होनेवाली रीएक्शन की आशंका कम हो जाती है।
सुविधा शुरू हो तो रोहतक जाने से मिलेगी मुक्ति
झज्जर में ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन नहीं होने से प्लाज्मा, प्लेटलेट्स, पीआरबीसी, करयोप्रिसिपेट ब्लड की व्यवस्था नहीं है। इसकी सुविधा नहीं रहने के कारण मरीजों को रोहतक पीजीआईएमएस रेफर कर दिया जाता है। वर्तमान में ब्लड बैंक में केवल रक्त लेने की व्यवस्था है। ब्लड कंपोनेंट मशीन चालू होने के बाद मरीजों को रोहतक पीजीआई में भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
वर्जन
ब्लड कंपोनेंट मशीन को इंस्टाल कराया जा चुका है। केवल लाइसेंस का इंतजार है। टीम निरीक्षण कर चुकी है। लाइसेंस मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
डाॅ. इंदिरा हसिजा, इंचार्ज, ब्लड बैंक, सिविल अस्पताल, झज्जर