प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने कहा कि अनाज, सब्जी व फल व्यापार पर बड़े घराने अपना कब्जा करना चाहते हैं। सरकार बड़े घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए अनाज मंडियां बंद करने पर तुली है। प्राइवेट कंपनी बड़े-बड़े वेयरहाउस व साइलो देश व प्रदेश में बना रहे हैं। इनमें धड़ल्ले से खाद्य सामग्री जमा की जा रही है। यह जनहित और समजहित में न होकर देश को आर्थिक संकट की ओर ले जाने वाला कदम है।
सोमवार को अनाज मंडी पहुंचे गर्ग ने कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण किसानों का लाखों क्विंटल गेहूं व सरसों मंडियों में खुले में पड़ा है। प्रदेश में बारिश के कारण किसानों को गेहूं व सरसों खराब होने का डर सता रहा है। मौसम विभाग बारिश की संभावना जता रहा है। सरकार को 72 घंटे में गेहूं व सरसों खरीद, उठान व भुगतान के सभी दावे फेल सिद्ध हुए हैं जबकि कई दिनों तक अनाज खरीद का उठान मंडियों से होता नहीं है। सरकार द्वारा सरसों की सरकारी खरीद ना करने के कारण किसानों को अपनी सरसों 600 से 1000 रुपए प्रति क्विंटल तक कम बेचनी पड़ रही है। सरकार की गलत नीतियों के कारण आढ़ती व किसान बर्बादी के कगार पर है। सरकार ने सरकारी गेहूं खरीद पर आढ़तियों की 10.99 रुपए व धान पर 9.19 रुपए आढ़त काम कर दी है। इसी प्रकार सरसों, नरमा, सूरजमुखी, बाजार, मूंग भी सरकार आढ़तियों की बजाएं सीधे सरकारी खरीद कर रही है।
इस मौके पर व्यापार मंडल प्रदेश महासचिव रमेश खुराना, अनाज मंडी पूर्व प्रधान डिंपल बुधवार, गुलशन खुराना, कमलेश कुमार चहल, पंकज सपड़ा, रमेश गर्ग, श्रीभगवान सिंगल व अन्य व्यापारी मौजूद रहे।