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Rohtak News: पीजीआईएमएस के सभी पीजी चिकित्सक बहुत जल्द होंगे बीएलएस में सक्षम

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01सीटीके41.. सीपीआर की जरूरत वाले मरीज को कृत्रिम सांस देने की प्रक्रिया समझाते चिकित्सक। स्रोत
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रोहतक। अब बहुत जल्द प्रदेश के सभी विभिन्न विभागों के पोस्ट ग्रेजुएट चिकित्सक बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) और एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) कोर्स कर गंभीर मरीज की आपात स्थिति को पहचान कर उसकी जान बचाने में सक्षम होंगे। यह कोर्स होने से किसी भी विभाग का पीजी चिकित्सक मरीज के लक्षणों की पहचान करते हुए उसे आपात स्थिति से बाहर निकालने की पूरी कोशिश कर सकेगा। रविवार को पीजीआईएमएस की स्किल लैब में प्रशिक्षकों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कोर्स किया गया।कोर्स शुरू होने से पीजी छात्रों को मिलेगी राहत
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राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की नई गाइडलाइन के अनुसार पीजी की शिक्षा के दौरान बीएलएस, एएलएस कोर्स करना अब आवश्यक है। विश्वविद्यालय में यह कोर्स शुरू होने से पीजी छात्रों को राहत मिलेगी। विश्वविद्यालय की ओर से कोर्स का एक पूरा मॉड्यूल तैयार किया गया। कोर्स की रूपरेख तैयार करने और मान्यता दिलाने में डाॅ. ध्रुव चौधरी, डाॅ. कुंदन मित्तल, डाॅ. सुरेश सिंघल व डाॅ. प्रशांत कुमार का कुशल नेतृत्व रहा।

यूएचएसबीएसीएलएस रखा गया है कोर्स का नाम
कोर्स का नाम यूएचएसबीएसीएलएस रखा गया है। इससे पूरे प्रदेश व आसपास के क्षेत्रों के पीजी छात्रों को राहत मिलेगी और उन्हें महंगे संस्थानों से यह कोर्स करने के लिए मजबूर नहीं होना होगा। स्किल लैब के इंचार्ज डाॅ. प्रशांत कुमार को कोर्स कोऑर्डिनेटर बनाया गया है।
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उत्तीर्ण हुए फैकल्टी ही पीजी छात्रों को दे सकेंगे प्रशिक्षण

प्रशिक्षकों को इस कोर्स का रविवार को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें पीजीआई के फार्माकोलोजी, कार्डियक एनेस्थीसिया, माइक्रोबायोलॉजी, नियोनेटोलॉजी, कॉर्डियोलॉजी, मेडिसिन, निश्चेतना, सर्जरी, फोरेंसिक मेडिसिन, पैथोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, पीडियाट्रिक समेत अस्पताल प्रबंधन विभाग की करीब 40 फैकल्टी और करीब 15 विभिन्न कॉलेजों की फैकल्टी हिस्सा ले रहे हैं। सभी प्रतिभागियों का एक टेस्ट लिया गया। इसमें उत्तीर्ण करने वाले को प्रमाणपत्र दिया जाएगा। इसमें उत्तीर्ण हुए फैकल्टी ही पीजी छात्रों को प्रशिक्षण दे सकेंगे।








इस कोर्स के माध्यम से पीजी चिकित्सकों में कौशल का विकास होगा। बाजार में ज्यादा खर्च करने पर भी इतनी गुणवत्तापूर्ण विशेषज्ञों की टीम प्रशिक्षण देने वाली नहीं मिलती। इससे मरीजों को फायदा होगा।
-डाॅ. ध्रुव चौधरी, डीन एकेडमिक अफेयर्स, यूएचएस



खुशी है कि मैं इसका कोर्स का हिस्सा हूं। दिन-प्रतिदिन विश्वविद्यालय पीजी चिकित्सकों के कौशल को बढ़ाने के कार्य कर रहा है। यह कोर्स उनके कार्य कुशलता को बेहतर बनाएगा।
-डाॅ. कुंदन मित्तल, चिकित्सा अधीक्षक

कोर्स करने के बाद हर विभाग का पीजी आपातकाल के समय पुनरुत्थान में सक्षम होगा। क्योंकि इस कोर्स में उन्हें अप्रतिक्रियाशील रोगी की पहचान, तुरंत मदद बुलाना, इमरजेंसी टीम एक्टिवेट करना, चेस्ट कंप्रेशन, कृत्रिम सांस और इलेक्ट्रिक शाॅक के माध्यम से दिल को पुनर्जीवित करने की कोशिश सिखाई जाएगी। इस कोर्स के एडवांस पार्ट में ईसीजी में होने वाले बदलाव की पहचान, सांस की नली को सुरक्षित रखना, उचित समय पर उचित दवाई का प्रयोग भी शामिल है।
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-डॉ. एसएस लोहचब, निदेशक, पीजीआईएमएस
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