रोहतक। शिक्षा विभाग ने अनपढ़ों को साक्षर बनाने की अनूठी पहल की है। इस दिशा में शिक्षा से वंचित 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को पढ़ना-लिखना सिखाया जा रहा है। न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (एनआईएलटी) के तहत रविवार को इन विद्यार्थियों की परीक्षा हुई। जिले के 125 केंद्रों पर 16038 ने परीक्षा दी।
जिला शिक्षा अधिकारी मंजीत मलिक की देखरेख में परीक्षा सुबह 10 से शाम पांच बजे के बीच हुई। परीक्षा का समय तीन घंटे का ही रहा। इसमें वैकल्पिक प्रश्न पूछे गए थे। तीसरी कक्षा तक के पाठ्यक्रम के अलावा तस्वीरों को शामिल किया गया था। इससे परीक्षार्थियों के लिए प्रश्न को समझना व उनका जवाब देना सरल रहा। एनआईएलटी अभियान के तहत यह पहली परीक्षा रही। इसमें परीक्षार्थियों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
इससे पूर्व, इन परीक्षार्थियों ने छह माह पढ़ाई की। इसकी जिम्मेदारी उनके परिवार के लोगों ने संभाली। शिक्षा विभाग ने पढ़ाई लिखाई से वंचित लोगों को साक्षर बनाने के लिए इनके परिवार के सदस्यों को लर्नर टीचर बनाया गया था। इन्हें छह माह का समय दिया गया था। विभाग की ओर से पढ़़ाई संबंधी सिलेबस भी ऑनलाइन मुहैया कराया गया। परीक्षा में 50-50 अंक के पढ़ने, लिखने व गणित के तीन पेपर हुए। अभियान को सही ढंग से चलाने के लिए नोडल अधिकारी बीआरसी लाखनमाजरा सदानंद को जिम्मेदारी दी गई है।
वर्जन
एनआईएलटी के तहत शिक्षा से वंचितों को साक्षर बनाने का प्रयास किया गया है। इसके तहत रविवार को पहली परीक्षा हुई। इसमें जिले के 16038 ने परीक्षा दी। परीक्षा बेहतर ढंग से हुई।
मंजीत मलिक, जिला शिक्षा अधिकारी।
22सीटीके36..कारोठ स्कूल में परीक्षा देती महिलाएं। संवाद- फोटो : संवाद
22सीटीके36..कारोठ स्कूल में परीक्षा देती महिलाएं। संवाद- फोटो : संवाद
22सीटीके36..कारोठ स्कूल में परीक्षा देती महिलाएं। संवाद- फोटो : संवाद
22सीटीके36..कारोठ स्कूल में परीक्षा देती महिलाएं। संवाद- फोटो : संवाद