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अफ्रीकन स्वाइन फ्लू: सूअर तोड़ रहे दम, मीट बिक्री पर नहीं प्रतिबंध, हेल्थ एक्सपर्ट मीट न खाने की दे रहे सलाह

Sun, 21 Aug 2022 02:50 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक (हरियाणा)

सार

हरियाणा के रोहतक में 120 से ज्यादा सूअर अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के कहर से मर चुके हैं। रोजाना सूअरों की मौत के बाद भी प्रशासन बेफिक्र है। जबकि अफ्रीकन स्वाइन फ्लू सूअरों के साथ इनके पालकों को भी प्रभावित कर सकता है। 
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वीटा प्लांट से जींद चौक तक मरे पड़े सूअर। अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा के रोहतक जिले में 120 से अधिक सूअरों की मौत हो चुकी है। इसकी वजह इनका अफ्रीकन स्वाइन फ्लू ग्रस्त होना है। इसके बावजूद पशुपालन विभाग की ओर से इसके मीट की बिक्री पर रोक नहीं लगाई गई है। जबकि हेल्थ एक्सपर्ट इस समय इसके मीट को न खाने की सलाह दे रहे हैं। सूअर पालकों को डर है कि उनके सूअर एक-एक करके मर रहे हैं। यदि यह बीमारी नहीं रुकी तो वह आर्थिक रूप से बर्बाद हो जाएंगे।

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जिले में 250 के करीब मीट की दुकानें हैं। रोजाना सूअरों की मौत के बाद भी प्रशासन बेफिक्र है। जबकि अफ्रीकन स्वाइन फ्लू सूअरों के साथ इनके पालकों को भी प्रभावित कर सकता है। पूरे प्रदेश में हड़कंप मचने के बाद भी बाजार में सूअर का मांस आसानी से उपलब्ध है। जिला प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।

 

पशुपालन विभाग एक ओर स्थिति सामान्य बता रहा है, जबकि नगर पालिका लगातार मृत सूअरों को दफन कर रही है। सूअरों की मौत को देखते हुए शनिवार को भी पशुपालन विभाग की टीम ने कलानौर का दौरा किया और साथ ही अन्य उप मंडलों का निरीक्षण कर सभी को अलर्ट किया है।


फार्म हाउस में हो चुका वैक्सीनेशन, गलियों वालों की सुध नहीं
पशुपालन विभाग दावा कर रहा है कि सूअरों का वैक्सीनेशन हो चुका है। लेकिन यह व्यवस्था फार्म हाउस में रह रहे सूअरों की है। वहीं काफी संख्या में सूअर लोगों ने अपने घरों में पाल रखे हैं जोकि उनकी आजीविका का साधन हैं। अधिकारियों के अनुसार जिले में करीब 10 हजार सूअर हैं और कुछ दिन पहले ही विभाग ने सभी को वैक्सीन लगा दी है। लेकिन इन गलियों में पल रहे सूअरों के वैक्सीनेशन की सुध किसी को नहीं है।

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आर्थिक संकट में आ रहे हैं सूअर पालक : बिडलान
नगर पालिका सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान संजय बिडलान ने बताया कि जिले में करीब 250 मीट की दुकानें हैं। स्वाइन फ्लू की दस्तक के बाद मीट की दुकानों पर इसका असर जरूर दिखाई देगा। इससे करीब पांच सौ लोगों का रोजगार संकट में है। इससे सूअर पालकों को वित्तीय हानि हो रही है। यह घटनाक्रम प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। प्रशासन को उचित कदम उठा कर संक्रमण को रोकना चाहिए और लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर उचित कार्रवाई करनी चाहिए। इसके साथ ही पीड़ितों को मृत सूअरों का मुआवजा देना चाहिए।

नियमानुसार मृत सूअरों को दफना रहे
जिले में करीब 10 हजार सूअर हैं। सभी सूअरों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। सूअर पालकों को उचित दिशा निर्देश दिए गए हैं। पशु चिकित्सकों की टीमें मौके का निरीक्षण कर रही हैं। मृत मिल रहे सूअरों को नगर निगम व नगर पालिका की टीम चिकित्सकों की निगरानी में छह फीट गहरे गड्ढे में दफना रही है। - डॉ. सूर्या खटकड़, उप निदेशक, पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग

जब तक सूअरों में संक्रमण की समस्या समाप्त नहीं होती, तब तक इसके मीट का प्रयोग करने से परहेज करना चाहिए। जिस सूअर पालक के सूअर की मौत हुई है, उसे अपनी जांच करवानी चाहिए। स्वाइन फ्लू मनुष्यों में भी है। इसलिए संक्रमित के संपर्क में रहने वालों को स्वयं को आइसोलेट करना चाहिए। - डॉ. एचके अग्रवाल, वरिष्ठ फिजिशियन एवं कुलसचिव, पीजीआईएमएस

सूअर के मीट के प्रयोग करने को लेकर पशुपालन विभाग को एडवाइजरी जारी करनी चाहिए। इस संबंध में विभाग की ओर से हमें कोई जानकारी नहीं दी गई है। जो व्यक्ति इनके संपर्क में रहे हैं, उन्हें आइसोलेट होना चाहिए। यह ड्रोपलेट से फैलने वाली बीमारी है। इसलिए इसके आसपास रहने वाले मास्क का प्रयोग करते हुए स्वच्छता का ध्यान जरूर रखें। - डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन
 

विभाग का दावा : स्थिति काबू में है
वहीं पशुपालन विभाग दावा कर रहा है कि स्थिति काबू में है, सूअरों का वैक्सीनेशन किया जा चुका है। लेकिन गली-मोहल्लों में पाले जा रहे सूअरों का वैक्सीनेशन न होने से पशुपालक चिंतित हैं। सवाल उठ रहा है कि प्रशासन के पास पिग फार्म करने वालों का डाटा तो उपलब्ध है, लेकिन जो सूअर पालक घर में अपने स्तर पर इन्हें पाल रहे हैं उनका वैक्सीनेशन कौन करेगा। विभाग न ही इन तक पहुंच पा रहा है।
 

नपा ने दस सूअरों को फिर किया दफन
कस्बे में सूअरों में बीमारी के चलते दिन प्रतिदिन मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। शनिवार को नगरपालिका टीम ने 10 सूअर दफन किए हैं। हालांकि अभी तक विभाग के पास यह आंकड़ा स्पष्ट नहीं है कि इलाके में कुल सूअर कितने हैं। यह एक बड़ी लापरवाही हो सकती है। नपा चेयरपर्सन प्रवीण कुमारी ने बताया कि सूअर पालक सूअर मरने के बाद तालाब या इधर उधर के इलाके में डाल कर चले जाते हैं। इनकी सूचना आसपड़ोस के लोगों द्वारा मिलती है। कोई भी इसको लेकर सामने नहीं आ रहा है।
 

शहर में भी खुले में पड़े हैं मृत सूअर, कोई कार्रवाई नहीं
वन सिटी निवासी अर्जुन सिंह ने बताया कि वीटा प्लांट से जींद चौक तक तीन से चार सूअर मृत अवस्था में मिले हैं। इसके चलते यहां बदबू फैली हुई है, सांस लेना दूभर हो गया है। इसकी शिकायत उपायुक्त को लिखित में 18 अगस्त को दी थी, लेकिन अभी तक इनका उठान नहीं हुआ है और न ही इन्हें दफनाया गया है।

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