रोहतक। शहर में दूषित पेयजल आपूर्ति लोगों के लिए जी का जंजाल बन गई है। तीन कालोनियों में गंदे पानी की आपूर्ति हो रही है। यहां के करीब 40 हजार लोग इस पानी को पीने के लिए मजबूर है। विडंबना यह है कि प्रशासन और विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। कहने को तो जनस्वास्थ्य विभाग ने लोगों की शिकायतें सुनने के लिए शिविर भी लगाए, ताकि उनकी समस्याओं का समाधान कर सके। लेकिन, शहर की तीन-तीन काॅलोनियों में काफी समय से दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है, इस ओर विभाग का ध्यान अभी तक नहीं गया है।
दो-दो बिल का भुगतान करने को मजबूर हैं कॉलोनीवासी
गांधी कैंप, पटेल नगर और झंग कॉलोनी में कई दिनों से यह समस्या बनी हुई है। इन काॅलोनियों के स्थानीय लोग रोजमर्रा के कामों के लिए पानी खरीद रहे हैं। ऐसे में उन्हें दो-दो बिल चुकाने पड़ रहे हैं, इससे उन पर आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है। नलों में सप्लाई हो रहा पानी पीने लायक नहीं है। इस कारण लोगों को पेयजल खरीदना पड़ रहा है। यही नहीं, घरों में लगे नल में आने वाले पानी का बिल भी चुकाना पड़ रहा है। जबकि यह पानी बीमार करने वाला है। यहां के लोग दूषित व बदबूदार पानी पी रहे हैं और हर माह इसका बिल भरने को विवश भी हैं। विभाग लोगों की इस समस्या से अनजान बना बैठा है।
पॉश इलाके में भी समस्या
शहर के गांधी कैंप, झंग कॉलोनी व पटेल नगर में शहर की आबादी का बड़ा हिस्सा रहता है। करीब 40 हजार से ज्यादा लोग यहां रहते हैं। झंग कॉलोनी पॉश इलाके में गिनी जाती है। यहां भी पिछले कई माह से दूषित पेयजल बड़ी समस्या बना हुआ है। इलाके के लोग इसके लिए उपायुक्त से शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
हर माह कैंपर के चुका रहे 600 रुपये
क्षेत्र के ज्यादातर घरों में पेयजल के लिए कैंपर मंगवाया जा रहा है। 10 लीटर की क्षमता वाले एक कैंपर का मूल्य 20 रुपये है। लोग रोजाना कम से कम एक कैंपर मंगवा रहे हैं। इसका प्रतिमाह बिल कम से कम 600 रुपये बनता है। इसी तरह जनस्वास्थ्य विभाग पेयजल सप्लाई के लिए भी हर माह शुल्क वसूलता है। ऐसे में लोगों को पानी के लिए दो-दो बिलों का भुगतान करना पड़ रहा है। इसके बावजूद पेयजल समस्या बनी हुई है। आर्थिक रूप से कमजोर लोग बूस्टर से पानी ढोकर लाते हैं।
जनशिकायत शिविर का लोगों को नहीं मिला फायदा
गांधी कैंप, पटेल नगर निवासियों ने बताया कि विभाग की ओर से लगाए जा रहे शिविर का उन्हें कोई लाभ नहीं मिला है। उनकी समस्या जस की तस है। समाधान नहीं किया गया है। समस्या के मूल में जाने के बजाय अधिकारी ऊपरी कार्रवाई करते हैं, यही कारण है कि समस्या बढ़ती जाती है।
समाधान के बजाय समस्या काे बढ़ा देते हैं कर्मचारी
गांधी कैंप के गुलशन ने बताया कि वे किराना स्टोर चलाते हैं, यहीं घर भी है। यहां पानी रोजाना करीब एक घंटे आ रहा है। कई बार दो टाइम पानी भी आता है, लेकिन पानी दूषित व बदबूदार है। शिकायत के बावजूद गड्ढे खोदकर समस्या बढ़ाने के अलावा विभाग ने और कुछ भी नहीं किया है।
साफ पानी न मिलना बड़ी समस्या
पटेल नगर के संजय कुमार ने बताया कि साफ पानी नहीं मिलना बड़ी समस्या है। छोटे से क्षेत्र में हजारों की संख्या में लोग निवास करते हैं। समय से पानी का बिल भी जमा करते हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया जाता है। दूषित पानी के कारण छत की टंकी को माह में दो बार साफ कराना पड़ता है।
कैंपर न मंगाए तो प्यासे रह जाएं
गांधी कैंप की सुमित्रा का कहना है कि सप्लाई का पानी पीने के काम नहीं आता है। जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से जो सप्लाई किया जाता है वह कई बार साफ भी दिखता है, लेकिन उसमें बदबू होती है। अगर कोई पानी कोई पी ले तो वह बीमार पड़ जाएगा।
दूषित पेयजल की जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर समस्या का समाधान अवश्य कराया जाएगा। विभाग ने लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए ही पिछले दिनों शिविर लगाए हैं।
-आरके शर्मा, अधीक्षण अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।
17सीटीके13... सुमित्रा गांधी कैंप। संवाद
17सीटीके13... सुमित्रा गांधी कैंप। संवाद
17सीटीके13... सुमित्रा गांधी कैंप। संवाद