झज्जर। जिले में 39 थैलेसीमिया पीड़ित मरीज हैं। इन सभी मरीजों को साप्ताहिक, मासिक या मरीज की स्थिति अनुसार रक्त बदलवाने के लिए पीजीआई रोहतक जाना पड़ता है। क्योंकि यह सुविधा फिलहाल झज्जर में नहीं है। राहत की बात यह है कि आने वाले दिनों में थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों को रक्त बदलवाने के लिए बार-बार रोहतक नहीं जाना पड़ेगा। झज्जर के सरकारी अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड सेपरेशन मशीन जल्द शुरू होने वाली है।
केंद्रीय टीम द्वारा ब्लड सेपरेशन मशीन को शुरू करने के लिए सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक का निरीक्षण कर लिया है और अब केवल लाइसेंस जारी होना बाकी है। लाइसेंस मिलने के बाद सिविल अस्पताल में ब्लड सेपरेशन मशीन शुरू हो जाएगी और थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों का रक्त सिविल अस्पताल में ही बदला जा सकेगा। जिले में कुल 39 थैलेसीमिया मरीज है, इसमें 29 बच्चे और 10 व्यस्क हैं। इन सभी को साप्ताहिक, मासिक या मरीज की स्थिति रक्त बदलवाने के लिए रोहतक जाना पड़ता है। चिकित्सकों की माने तो इनकी अधिक से अधिक उम्र लगभग 40 साल तक ही रहती है। 8 मई को हर साल विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है। इस बार भी रेडक्रास सोसायटी व सिविल अस्पताल प्रशासन की तरफ से विश्व थैलेसीमिया दिवस पर दीनबंधु सर छोटूराम धर्मशाला में 8 मई को रक्तदान शिविर आयोजित किया जा रहा है। यही नहीं 8 से 22 मई तक थैलेसीमिया पखवाड़ा मनाया जाएगा।
दो प्रकार का होता है थैलेसीमिया
थैलेसीमिया बच्चों को माता-पिता से अनुवांशिक तौर पर मिलने वाला ब्लड डिसऑर्डर है। इस रोग के होने पर शरीर की हीमोग्लोबिन निर्माण प्रक्रिया में बाधित होती है, इसके कारण एनीमिया के लक्षण दिखाई देते हैं। इसकी पहचान तीन माह की आयु के बाद ही होती है। इसमें रोगी बच्चे के शरीर में खून की भारी कमी होने लगती है, इसके कारण उसे बार-बार बाहर से खून की आवश्यकता पड़ती है। थैलेसीमिया दो प्रकार का होता है। यदि पैदा होने वाले बच्चे के माता-पिता दोनों के जींस में माइनर थैलेसीमिया होता है तो बच्चे में मेजर थैलेसीमिया हो सकता है जो काफी घातक होता है। किन्तु माता-पिता में से एक ही में माइनर थैलेसीमिया होने पर बच्चे को खतरा नहीं होता।
थैलेसीमिया के लक्षण
बच्चों के नाखून और जीभ पीली पड़ जाने से पीलिया या जौंडिस का भ्रम पैदा हो जाता हैं। बच्चे के जबड़ों और गालों में असामान्यता आ जाती हैं। बच्चे का विकास रुक जाती हैं और वह उम्र से काफी छोटा नजर आता हैं। सूखता चेहरा, वजन न बढ़ना, हमेशा बीमार नजर आना, कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ आदि ये भी लक्षण दिखाई देते हैं।
थैलेसीमिया की करवाए जांच
-शादी से पहले
-गर्भवती महिलाएं
-युवक-युवतियां
-थैलेसीमिया मरीज के सगे संबंधी।
-13 से 15 साल के लड़के-लड़कियां
थैलेसीमिया मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं
-सभी सरकारी और निजी ब्लड बैंकों की तरफ से मुफ्त ब्लड यूनिट।
-गर्भवती महिलाओं के लिए निशुल्क स्क्रीनिंग टेस्ट
-महिलाओं और उनके जीवनसाथी के लिए निशुल्क एचपीएलसी परीक्षण
-पीजीआई चंडीगढ़ में प्रसव पूर्व निदान सेवाएं और खर्चों की प्रतिपूर्ति।
-मुफ्त एंबुलेंस सेवा।
-रोडवेज बसों में मुफ्त परिवहन सुविधा।
वर्जन
थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों को बार-बार रक्त की जरूरत पड़ती है। इसके लिए रक्तदान शिविर लगाए जाते हैं ताकि थैलेसीमिया पीड़ितों को खून मिल सके। जिले में 39 मरीज हैं। फिलहाल पीजीआई में इनका रक्त का बदलाव होता है। सिविल अस्पताल झज्जर में ब्लड सेपरेशन मशीन शुरू होने के बाद यही पर रक्त बदलाव की सुविधा मिल सकेगी।
- डॉ. राहुल जाखड़, नोडल ऑफिसर, स्वास्थ्य विभाग, झज्जर
आंवला। नगरिया सतन के पूर्व प्रधान, मतदाता सूची से नाम गायब-संवाद
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