रोहतक। दहेज उत्पीड़न और विवाहिता को आत्महत्या के लिए मजबूर करने पर अदालत ने पति को 10 व सास को सात साल कैद व जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है। एडीजे डॉ. गगनगीत कौर की अदालत ने विवाहिता के ससुर को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।
पीड़ित पक्ष के वकील बीरेंद्र शर्मा ने बताया कि 2018 में सोनीपत जिले के गांव खांडा निवासी श्रीप्रकाश ने महम थाने में शिकायत दी थी कि उसने बेटी रेखा का विवाह मई 2011 में बलम्बा गांव निवासी प्रवीण के साथ किया था। शादी के बाद से उसकी बेटी को दहेज के लिए तंग किया जाता था। 2015 में खाने के अंदर नींद की गोलियां मिला दी गई। उस समय तो समझौता हो गया, लेकिन उसकी बेटी का उत्पीड़न बंद हुआ। वर्ष 2018 में उसकी बेटी का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला।
विवाहिता के पिता का आरोप था कि पति, सास व ससुर ने दहेज के लिए उसकी बेटी की हत्या की है। महम पुलिस ने हत्या की धारा जोड़ दी, जिसे जांच के बाद आत्महत्या के लिए मजबूर करने की धारा 306 में बदल दिया गया। तभी से जिला अदालत में केस की सुनवाई चल रही थी।