देशभर में तीन दिन के अंदर दूसरी बार शनिवार को रोहतक सबसे प्रदूषित शहर रहा है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 389 (बेहद खराब श्रेणी) पहुंच गया है। जबकि 30 अक्तूबर को देश में सबसे प्रदूषित शहर रोहतक का एक्यूआई 426(गंभीर श्रेणी) था। देश के 9 बेहद प्रदूषित शहरों में हरियाणा के छह शहर शामिल हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार माने तो एक नवंबर को सीजन में एक दिन के अंदर सबसे ज्यादा 19 जगह पराली जलाने के मामले सामने आए हैं।
शनिवार को एक्यूआई रिपोर्ट के मुताबिक बल्लभगढ़ 319, चरखीदादरी 375 , फतेहाबाद 334, जींद 330, कैथल 324 हरियाणा के शहर हैं। इनके अतिरिक्त दिल्ली 303, बागपत 321 और मेरठ 326 है। हालांकि, एक दिन पूर्व हरियाणा के भिवानी का एक्यूआई 406 था, जो देश में सबसे प्रदूषित शहर था। वहीं, बल्लभगढ़ 320, सोनीपत 317, फतेहाबाद 309 और राजस्थान के बीकानेर का एक्यूआई 309 था। इसी तरह खराब श्रेणी में बहादुरगढ़ 254, गुरुग्राम 276, हिसार 206, करनाल 251, कुरुक्षेत्र 276, नारनौल 215, पानीपत 287, सोनीपत 239 और यमुनानगर का एक्यूआई 281 है।
अभी तक पराली जलाने के 118 मामले
हरियाणा में अभी तक पराली जलाने के 118 मामले आ चुक हैं। सबसे ज्यादा पराली जलाने के 13 मामले 19 अक्तूबर को दर्ज किए गए थे। इनमें सबसे ज्यादा जींद में 26, कैथल में 17 और फतेहाबाद में 15 मामले आए हैं।
चंडीगढ़ पीजीआई में सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर रविंद्र खैवाल के मुताबिक हरियाणा के कई शहरों में वायु गुणवत्ता तेजी से गिरकर बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। प्रदूषण का मुख्य कारण सूक्ष्म कण (पीएम2.5), धूल और धुआं सामने आ रहा है। मध्यम गति की हवाओं के बावजूद स्थानीय स्तर पर वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल और छोटे उद्योगों से होने वाला उत्सर्जन हवा को और प्रदूषित कर रहे हैं।
उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण आसपास के इलाकों से धुआं और पराली जलाने का प्रभाव भी हरियाणा के शहरों तक पहुंच रहा है। विशेष रूप से रोहतक, चरखी दादरी और बल्लभगढ़ प्रदूषण के नए हॉटस्पॉट के रूप में सामने आए हैं। इसके अतिरिक्त रातों के ठंडा होने और पश्चिमी विक्षोभ में देरी होने के कारण बारिश नहीं हो पा रही है, जिससे हवा की प्राकृतिक सफाई रुक गई है। वहीं, हरियाणा और पंजाब में इस मौसम में पराली जलाने की घटनाएं अपने उच्चतम स्तर पर हैं। इससे क्षेत्रीय स्तर पर प्रदूषण का परिवहन बढ़ने और पूरे उत्तर भारत में वायु गुणवत्ता और अधिक खराब होने की आशंका जताई जा रही है।