कोसली (रेवाड़ी)। बाईपास बनाने को लेकर सरकार और धनिया गांव के किसानों के साथ 10 वर्ष से चला आ रहा भूमि मुआवजा का विवाद सुलझ गया है। इससे कोसली शहर में 10 वर्ष से अधूरे पड़े बाईपास को बनाने का रास्ता भी साफ हो गया है। किसानों ने सहमति दे दी है। संभवतया अक्तूबर में किसानों को मुआवजा देकर कार्य शुरू करा दिया जाएगा। बाईपास बनने के बाद रेवाड़ी व झज्जर जिले के लाखों लोगों को लाभ मिलेगा। साथ ही कोसली के विकास को गति मिलेगी।
कांग्रेस कार्यकाल में वर्ष 2013 में शुरू हुआ बाईपास का कार्य रेवाड़ी जिला की सीमा में चल रहा था, लेकिन झज्जर जिले के गांव धनिया के कुछ किसानों की 15 किला जमीन बाईपास में आती थी। किसानों ने शुरू में तो बाईपास बनाने की स्वीकृति दे दी, परंतु बाद में मुआवजा की राशि पर सरकार के साथ सहमति नहीं बनी। बाद उन्होंने अपनी जमीन देने से इंकार कर दिया। मामले को लेकर पांच साल तक जिला झज्जर व रेवाड़ी के जिला उपायुक्तों ने बार-बार किसानों के साथ बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन किसानों ने जमीन नहीं दी। इसके बाद स्थानीय विधायक लक्ष्मण सिंह ने दूसरी तरफ से बाईपास बनाने के लिए वर्ष 2022 में सर्वे का काम नए सिरे से करवाने और जो डेढ़ किलोमीटर का बाईपास बन चुका है। इसे रद्द कर देने की मांग की थी। यह मामला उन्होंने विधानसभा में भी उठाया था। इसके बाद सरकार ने गांव नठेड़ा के बाहर से होते हुए गांव गुजरवास के पास कोसली कनीना मार्ग में मिलाए जाने को लेकर प्रशासन से सर्वे करवाया, लेकिन सर्वे में किसानों की अधिक जमीन आने से मुआवजे का भारी भरकम बोझ सरकार पर गिरता देख एक बार पुन: धनिया गांव के किसानों से बातचीत शुरू की। किसानों ने प्रशासन से पहले प्रयास में 60 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा राशि लेकर अपनी जमीन देने पर सहमति जताई। वहीं सहादत्तनगर के किसानों ने भी इसमें अपनी सहमति जताते हुए हस्ताक्षर करते ही बाईपास बनाने का रास्ता साफ हो गया है, हालांकि अभी 85 प्रतिशत किसानों ने ही जमीन देने की सहमति जताई है, अभी 15 प्रतिशत किसानों के हस्ताक्षर बाकी है।
तीन गांवों के किसानों की लगती है 24 एकड़ जमीन
बाईपास के निर्माण में तीन गांवों के किसानों की करीब 24 एकड़ जमीन लगती है। इसमें 15 एकड़ जमीन धनिया गांव के किसानों की, छह एकड़ सहादत्तनगर के किसानों की तथा तीन एकड़ कोसली के किसान की लगती है। सरकार से मुआवजे को चला आ रहा विवाद अब सुलझ गया है।
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वर्जन:
बाईपास को पूरा करने में झज्जर जिले के किसानों की जमीन लगती थी। उन्होंने मुआवजे को लेकर सहमति जता दी है। इसके पूरा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
-विरेन्द्र सिंह, एसडीओ, लोक निर्माण विभाग