रेवाड़ी। अहोई अष्टमी के दिन पूजा करते महिलाएं। स्रोत : ग्रामीण
रेवाड़ी। पुत्र के दीर्घायु की कामना को लेकर अहोई अष्टमी का व्रत रखा गया। महिलाओं ने सुबह अहोई माता की कथा सुनी और बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया। महिलाओं ने अपने घरों में पृथ्वी को पवित्र करके चौक पूरकर फिर दो दोगड़, मोली (नाला) बांधकर, रोली से सतिए बनाए।
लोटे में जल भरकर अहोई के सामने रखा और अहोई माता का पूजन किया। हाथों में गेहूं के दाने लेकर अहोई माता की कहानी सुनी और अहोई माता को स्याऊ की माला पहनाई। अहोई के सामने पूजन करते हुए कपड़े आदि रखे। माताओं ने अपने बच्चों को नए कपड़े पहनाकर उन्हें तिलक लगाया। गांव पीथडावास की सरपंच अनिता शर्मा ने अहोई अष्टमी व्रत की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। महिलाएं पुत्र की रक्षा, लंबी आयु और मंगल कामना के लिए यह व्रत रखती है। हिंदू संस्कृति में त्योहार और व्रत का विशेष महत्व है।