संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। धारूहेड़ा स्थित ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनी लाइफ लांग में मार्च में हुए ब्लास्ट के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एनजीटी को अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद, नई मुंबई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कंपनी में ब्लास्ट बफिंग मशीन में शॉर्ट सर्किट के कारण हुआ था। शॉर्ट सर्किट की वजह से चिंगारी निकली और यह हादसा हुआ। अब सवाल यह है कि जब चिंगारी से बॉयलर फटा तो 16 लोगों की मौत की जिम्मेदारी काैन लेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चिंगारी ने शुरू में एक बफिंग मशीन के पास जमी महीन धूल को प्रज्वलित किया। पीवीसी सेक्शन पाइप जो एल्युमिनियम धूल से सटा हुआ था, उसमें आग लग गई। यही सीसीटीवी में देखने को मिला। यह बात भी सामने आई है कि मौके पर ऑपरेटर ने चिंगारी को सुलगते देखा और पैर से बुझाने की कोशिश की, लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला।
सुरक्षा ऑडिट की टीम में कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तीन विशेषज्ञ सदस्य शामिल थे। अप्रैल में टीम ने घटनास्थल का दौरा किया था और बारीकी से विश्लेषण किया था। इस दौरान कोई गंभीर चूक या घोर लापरवाही नहीं देखी गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दुर्घटना का कोई स्पष्ट या अस्पष्ट कारण भी नहीं पता चल पाया है। फिलहाल इस मामले को अब एनजीटी ने बंद कर दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो महीन धूल जमी हुई थी, जिसमें एल्युमिनियम था। आखिर इसे साफ क्यों नहीं कराया गया। अगर एल्युमिनियम को साफ कराया होता तो हादसा नहीं होता, जैसा कि औद्योगिक विशेषज्ञों की टीम ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया था। मशीन के पास जमा एल्युमिनियम को धूल बताया जा रहा है, जबकि इस हादसे का सबसे बड़ा कारण है एल्युमिनियम ही था। संवाद
औद्योगिक विशेषज्ञों की टीम ने बताया था लापरवाही
औद्योगिक विशेषज्ञों की टीम ने जब जांच की तो पाया था कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया गया है, क्योंकि बफिंग प्रक्रिया के दौरान मशीन में चिंगारी उत्पन्न हुई। चिंगारी को रोकने के लिए किसी प्रकार का कोई प्रबंध नहीं किया गया था। जो धूल जमी हुई थी, उसमें एल्युमिनियम थी, जो ज्वलनशील पदार्थ होता है, इसलिए किसी प्रकार की सावधानी नहीं बरती जा रही थी। प्लांट को घेरना, वर्किंग हाॅल को धूल से मुक्त रखना और खुली रोशनी को दूर रखना, इन बातों पर भी ध्यान नहीं दिया गया था। श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण नहीं प्रदान किए गए थे। कारखाने में किसी प्रकार का कोई मेडिकल वार्ड नहीं था।
16 मार्च की शाम हुआ था विस्फोट
16 मार्च की शाम कंपनी में विस्फोट हुआ था। इस घटना में 39 लोग घायल हुए थे। इलाज के दौरान 16 लोगों की मौत हो गई थी। बताया था कि कंपनी के बॉयलर का डस्ट कलक्टर पहले भी दो बार फट चुका था, लेकिन उस समय कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ था। कंपनी की लापरवाही से यह हादसा हुआ। मामले में मई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहाली, पंजाब निवासी कुलबीर सिंह वर्मा व मोहल्ला दयाराम नगर, धारूहेड़ा निवासी प्रमोद कुमार यादव के रूप में हुई थी। प्रमोद कुमार मेंटेनेंस मैनेजर व कुलबीर सिंह वर्मा सहायक मैनेजर थे। पुलिस ने आरोपियों को अदालत में पेश करके न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। 62 दिन बाद इस मामले में दो गिरफ्तारी हुई थी।
वर्जन
कारखाने में कोई बॉयलर स्थापित नहीं था। आग लगने का कारण पर्यावरण का पालन न करना भी नहीं बताया गया है। एनजीटी ने मामले को बंद कर दिया है। -हरीश शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड