संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। आदेश के बाद भी प्लॉट की रजिस्ट्री के लिए ट्रांसफर परमिशन (स्थानांतरण अनुमति) जारी नहीं करने पर उपभोक्ता आयोग की अदालत ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के ईओ दीपक घनघस के खिलाफ सशर्त गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। अब मामले की सुनवाई 24 अक्तूबर को होगी।
इस मामले उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन संजय कुमार खंडूजा व सदस्य राजेंद्र प्रसाद ने फरवरी में सुनवाई करते हुए एचएसवीपी पर जुर्माना लगाया था। आदेश में कहा था कि 25 हजार रुपये जुर्माना के साथ ही 11 हजार रुपये वाद खर्च भी देने होंगे। 2023 में सुनीता यादव ने अधिवक्ता हरि सिंह के माध्यम से उपभोक्ता आयोग की अदालत में याचिका दायर की थी। सेक्टर 4 निवासी सुनीता यादव पत्नी महेश ने अपने चचेरे भाई संजीव कुमार के साथ मिलकर सेक्टर-19 में एक प्लॉट खरीदा था। यह प्लॉट 538.20 वर्ग गज का है। 10 अक्तूबर 2019 में प्लॉट की रजिस्ट्री करा ली गई। शिकायतकर्ता के अनुसार रजिस्ट्री के वक्त रेवाड़ी तहसील में नियमानुसार 4 लाख 92 हजार 100 रुपये स्टांप ड्यूटी भी जमा कराई थी। लेकिन कुछ समय बाद संजीव कुमार ने अपना आधा हिस्सा चचेरी बहन सुनीता यादव को बेच दिया।
इसके बाद हरियाणा विकास प्राधिकरण कार्यालय में ट्रांसफर परमिशन (टीपी) के लिए आवेदन किया। प्राधिकरण ने पूरे प्लॉट 538.20 वर्ग गज के ट्रांसफर का परमिशन दे दिया। इसके बाद सुनीता की ओर से रजिस्ट्री के लिए रेवाड़ी तहसील में संपर्क किया गया। तहसील में कर्मचारियों ने संजीव कुमार से सुनीता के नाम हो रहे आधे प्लॉट की बजाय पूरे प्लॉट की स्टांप ड्यूटी 4 लाख 92 हजार 100 रुपये फिर से जमा कराने को कहा। इस पर सुनीता ने आपत्ति जताई। इसके बाद रजिस्ट्री का काम नहीं हो पाया था।