कोसली। कोसली-भाकली नामकरण विवाद को लेकर सोमवार को कोसली गांव के सैकड़ों लोग एसडीएम को ज्ञापन देने पहुंचे। एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम दिए ज्ञापन में लिखा गया है कि दो दिन में उनके गांव के नाम से चले आ रहे 45 साल से कोसली बस स्टैंड का नाम जो बदल कर शहीद सत्यप्रकाश कर्मशाला भाकली किया गया है। उसे नहीं बदला तो गांव आगामी कार्यवाही धरना-प्रदर्शन के साथ साथ भाजपा के किसी भी नेता को आगामी चुनाव में प्रचार के लिए नहीं घुसने देंगे। सोमवार को सुबह नौ बजे से ही गांव कोसली के लोग कोसली मठ के सामने जुटने शुरू हो गए थे और दस बजे तक सैकड़ों की संख्या में एकत्र होकर लोगों ने भाजपा सरकार व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी की।
रविवार को हुई थी पंचायत
लंबे समय से कोसली व भाकली के बीच नामकरण को लेकर चला आ रहा विवाद एक बार फिर जिला प्रशासन व कोसली के जनप्रतिनिधियों की वजह से फिर तूल पकड़ने लगा है। विवाद का कारण पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एक वर्चुअल रैली के माध्यम से कोसली के विधायक की उपस्थिति में कोसली बस अड्डे पर बनी कार्यशाला का उद्घाटन किया था, जिसमें कार्यशाला का नाम शहीद सत्यप्रकाश कार्यशाला भाकली कर दिया, जबकि यह कार्यशाला कोसली बस अड्डे के अधीन आती है। रविवार को नामकरण को लेकर उपजे इस विवाद के कारण कोसली गांव की ग्राम सभा हुई जिसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया था। सभी ग्रामीणों ने इस कार्य के लिए जिला प्रशासन व कोसली के जनप्रतिनिधियों पर विरोध जताया था।
51 सदस्यीय संघर्ष समिति का गठन किया
लोगों का कहना है कि जब सरकार व यहां के जनप्रतिनिधियों को पता है कि कोसली व भाकली गावों का नामकरण को लेकर आपसी विवाद है। फिर भी नामकरण क्यों किया गया। पंचायत में एक 51 सदस्यीय संघर्ष समिति का गठन किया है जिसका अध्यक्ष रामफल कोसलिया को बनाया गया है।
लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर कमेटी प्रधान रामफल कोसलिया, सरपंच रामकिशन जांगड़ा, तेजपाल यादव, रवि यादव, ओमप्रकाश डाबला, मनोज कोसलिया, कैलाश बाई, होशियार सिंह नम्बरदार, रतन कुमार एडवोकेट, अविनाश यादव, रमेश शर्मा, रिंकू कोसलिया, कृष्ण पंच, सतबीर पंच, मिथलेश पंच, आजाद विजय, गुड्डू प्रधान समस्त ग्राम पंचायत सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित थे।
कोसली गांव के लोग मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देने आए थे। मैंने ज्ञापन लेकर आगामी कार्रवाई के लिए जिला उपायुक्त को भेज दिया है।
उदय सिंह, एसडीएम, कोसली।