संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। इस बार दीपावली पर खासा उत्साह देखा जा रहा है। धनतेरस से पहले लोग काफी संख्या में खरीदारी के लिए निकल पड़े हैं। लोग अभी से बर्तनों की खरीदारी करने लगे हैं। बाजार में बर्तन की दुकानों पर नई वैराइटी के बर्तन भी आ चुके हैं। कई दुकानदार ग्राहकों को लुभाने के लिए ऑफर भी दे रहे हैं।
बर्तन व्यवसायी राकेश ने बताया कि इस बार धनतेरस से पहले ही लोगों में उत्साह देखने को मिल रहा है। ग्राहकों को डिजाइनर बर्तन खूब भा रहे हैं। लोग घरेलू उपयोग के साथ-साथ पूजा के बर्तन भी खरीद रहे हैं। दुकानदार महेश ने बताया कि धनतेरस पर बाजार गुलजार रहता है। इस बार ज्यादा ग्राहक आने की उम्मीद है। खासकर महिलाएं बड़ी संख्या में खरीदारी के लिए निकल रही हैं। उन्हें आकर्षक और नए-नए डिजाइन पसंद आते हैं।
व्यापारी अशोक कुमार बताते हैं कि त्योहारों पर इस बार खासा उत्साह देखा जा रहा है। बर्तनों का बाजार धनतेरस पर खूब चलता है। इसको देखते हुए कई नए आइटम लाए गए हैं। बर्तनों की अलग-अलग और डिजाइन लोगों को पसंद आ रही है। स्टील और तांबे के बर्तन लोगों को काफी पसंद आते हैं, ज्यादातर लोग इन्हें खरीदते हैं।
पीतल के बर्तनों की अधिक मांग
बाजार में स्टील के बर्तन का मूल्य 150 से 200 रुपये किलो से आरंभ है। वहीं, पीतल का रेट 650 से रुपये किलो से शुरू है। कॉपर के बर्तन का मूल्य 950 रुपये किलो से शुरू है। अधिकतर लोग पीतल के बर्तन ही खरीद रहे हैं। साथ ही पूजा के लिए विशेष थाली भी लोग खूब पसंद कर रहे हैं।
पीतल नगरी के नाम से मशहूर है रेवाड़ी
रेवाड़ी को पीतल नगरी के नाम से भी जानते हैं। इसके पीतल का इतिहास करीब करीब 500 वर्ष पुराना है। कहा जाता है कि कई वर्ष पहले रेवाड़ी में पीतल के हथियार बनाए जाते थे, जिनका इस्तेमाल युद्धों में भी किया गया था। रेवाड़ी शहर में एक ब्रास मार्केट भी हुआ करती थी, जो समय के साथ आम बाजारों में तब्दील हो गई। जब पानीपत की पहली लड़ाई हुई थी, तब रेवाड़ी में बनाई गई पीतल की तोपों का पहली बार इस्तेमाल किया गया था। सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य (हेमू) रेवाड़ी के ही रहने वाले थे, उन्होंने ही रेवाड़ी में पीतल की तोपें बनाने का काम शुरू किया था, जिसके बाद रेवाड़ी में पीतल का कारोबार बढ़ता चला गया।
पहले रेवाड़ी के हर घर में होता था पीतल का काम
पीतल का कारोबार करने वाले कारोबारी बताते हैं कि आजादी के बाद रेवाड़ी में पीतल के बर्तनों का काम काफी बड़ी मात्रा में होता था। शहर की पंजाबी मार्केट के आसपास के करीबन हर घर में पीतल के बर्तन बनाने का काम होता था। इसी उद्योग से जुड़े बीरबल बताते हैं कि उनके दादा, पिता और अब वो भी 30 वर्षों से पीतल का काम करते आए हैं, लेकिन अब पीतल का काम काफी कम हो गया है।
व्यापारी बीरबल बताते हैं कि कुछ समय पहले तक करीबन 600 परिवार इस उद्योग से जुड़े हुए थे, लेकिन वक्त के साथ पीतल का काम मंद पड़ गया, जिसके कारण 600 से ये आंकड़ा 100 परिवारों तक ही सीमित रह गया। हालांकि, लोग अभी पीतल खरीदने को इच्छुक हैं। रेवाड़ी का पीतल काफी लोकप्रिय है।
क्या बोले दुकानदार
इस बार कारोबार काफी अच्छा जा रहा है। धनतेरस के दिन काफी संख्या में लोगों की खरीदारी करने की उम्मीद है। कारोबार इस बार पिछले साल की तुलना में काफी बढ़ा है।
- दीपक भालिया, बर्तन भंडार।
बर्तन व्यापारियों के लिए यह दिवाली काफी अच्छी जाएगी। क्योंकि ग्राहक अभी से ही आ रहे हैं। धनतेरस के दिन ग्राहकों के और आने की उम्मीद है।
- सुभाष चंद, दुकानदार।