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उद्योगों में स्थानीय युवाओं को 75 फीसदी रोजगार के फैसले के बावजूद बेरोजगारी

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रेवाड़ी। सरकार की ओर से स्थानीय युवाओं को 75 फीसदी रोजगार देने के फैसले के बावजूद जिले युवा बेरोजगार हैं। उधर लगातार बाहरी राज्यों से आने वाले युवाओं की संख्या बढ़ रही है। यह मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित हैं। मामले पर उद्योग प्रबंधकों ने कहा कि अभी मामला अदालत में है, इसलिए चुप रहना ही सही।
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जिला रेवाड़ी में करीब सात सौ छोटे-बड़े उद्योग हैं। इनकी प्रतिनिधि संस्था रेवाड़ी चेम्बर ऑफ कॉमर्स भी सरकार के फैसले को लेकर शुरू से पक्षधर रही। गृहमंत्री अनिज विज से लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल तक से मुलाकात के दौरान उक्त संस्था के चेयरमैन एसएन शर्मा और महासचिव अनुराधा यादव ने साफ तौर पर उद्योगों की ओर से सरकार के फैसले पर कोरोना काल में हामी की। इस मामले पर अब उक्त संस्था के चेयरमैन एसएन शर्मा ने कहा कि अब यह मामला उच्च अदालत में है, इसलिए हमें लगता है कि हमें मामले में चुप रहना ही सही है।
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जिले में रोजगार कार्यालय में संजीदा युवा पंजीकरण
बेरोजगारी के मामले में जिला रोजगार कार्यालय से जुटाए गए आंकड़े के अनुसार 31 दिसंबर 2020 तक रोजगार विभाग में 22738, 31 दिसंबर 2021 तक 20881 और 30 जून 2022 तक 19566 युवाओं का संजीदा पंजीकरण हो चुका है।
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निर्णय लागू करने की राह का रोड़ा
यह निर्णय लागू करने की राह का मुख्य रोड़ा यह है कि उद्योगों को प्रदेश में कुशल तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त युवा नहीं मिल रहे। इस वजह से बाहरी राज्यों के प्रवासी श्रमिकों को उद्योगों को लगातार जगह मिल रही। दूसरा प्रदेश के युवाओं के स्वतंत्र और स्पष्ट विचारधारा तथा यूनियन बना लेना भी उद्योग प्रबंधन को पसंद नहीं आ रही है, जिसकी वजह से इनको किसी न किसी बहाने नौकरी देने से परहेज किया जाता है।
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बेरोजगारों को रोजगार दिलाने का संघर्ष का अतीत
जिले में बेरोजगारों को रोजगार दिलाने का अतीत रेवाड़ी के पूर्व विधायक रघु यादव के विधायक काल यानी चौ. भजनलाल के मुख्यमंत्रित्व काल में शुरू हुआ और अब मौजूदा मनोहर सरकार में उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने 75 फीसदी रोजगार को लेकर अहम निर्णय पर अमल शुरू हुआ मगर परिणाम अभी तक बेरोजगारी की समस्या जस की तस है। दक्षिण हरियाणा में बेरोजगारों को यह निर्णय लागू होने के बाद रोजगार मिलने की काफी उम्मीद थी जो अभी केवल उम्मीद ही बनी हुई हैं।
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