फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rewari News: भाजपा के दो बागी प्रत्याशी बने चिरंजीव राव की हार के कारण

Wed, 09 Oct 2024 01:30 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
विज्ञापन
रेवाड़ी। हार के बाद अकेले मतगणना केंद्र से बाहर आते रेवाड़ी से कांग्रेस प्रत्याशी चिरंजीव राव।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन


रेवाड़ी। रेवाड़ी विधानसभा सीट पर भाजपा के दो बागी प्रत्याशी आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार सतीश यादव और निर्दलीय प्रशांत सन्नी कांग्रेस प्रत्याशी चिरंजीव राव की हार का कारण बने। दोनों बागियों ने भाजपा के वोट को प्रभावित तो नहीं लिया लेकिन यादव मतों में सेंध लगाई जिससे कांग्रेस को हार मिली।
रेवाड़ी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा का सीधा मुकाबला था। भाजपा से बागी होकर आम आदमी पार्टी की टिकट से चुनाव लड़कर सतीश यादव ने 18427 वोट हासिल किए हैं। वहीं, भाजपा के दूसरे बागी नेता प्रशांत सन्नी ने निर्दलीय चुनाव लड़कर 7787 वोट प्राप्त किए। इस तरह देखा जाए तो भाजपा के दोनों बागियों ने 26214 वोट हासिल किए हैं। चिरंजीव राव 28769 वोटों से हारे हैं। दोनों बागी नेताओं के चुनाव लड़ने के कारण भाजपा चिंतित थी, क्योंकि 2019 में भाजपा नेता रणधीर सिंह कापड़ीवास टिकट न मिलने से नाराज हो गए थे और उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था। तब भाजपा को हार मिली थी। मगर उस समय मात्र 1317 वोटों से कांग्रेस प्रत्याशी चिरंजीव राव जीते थे। इस बार कांग्रेस का वोट सतीश यादव और प्रशांत सन्नी में बंट गया। भाजपा के वोटर भाजपा के साथ ही रहे। नुकसान केवल चिरंजीव राव को उठाना पड़ा।
विज्ञापन


बावल : एमएल रंगा को नहीं मिला अपने ही नेताओं का साथ

बावल विधानसभा क्षेत्र में इस पर कांग्रेस के टिकट के 50 से अधिक दावेदार थे, लेकिन टिकट 2019 में विधानसभा चुनाव हारे डॉक्टर एमएल रंगा को दिया गया जिससे कई नेता नाराज थे। डॉक्टर एमएल रंगा को कांग्रेस के बाकी नेताओं का साथ कुछ खास नहीं मिल रहा था। दूसरी तरफ बावल विधानसभा क्षेत्र में इंद्रजीत काफी प्रभाव रखते हैं। यही कारण रहा कि 2014 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे डॉक्टर बनवारी लाल को जीत मिली थी, 2019 में भी वही जीते थे। इस बार पहली बार चुनाव लड़ रहे डॉक्टर कृष्ण कुमार भाजपा से जीते हैं।
विज्ञापन


कोसली विधानसभा में राव इंद्रजीत का काफी प्रभाव

कोसली विधानसभा के कांग्रेस प्रत्याशी जगदीश यादव को 17209 वोटों से हार मिली है। कोसली विधानसभा में राव इंद्रजीत का काफी प्रभाव है। 2009 में परिसीमन के तहत जाटूसाना सीट खत्म हुई तो कोसली अस्तित्व में आई थी। प्रदेश गठन के बाद हुए 13 विधानसभा चुनाव में 7 बार यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री राव बीरेंद्र सिंह परिवार के पास रही। राव बीरेंद्र सिंह का देहांत हुआ तब राव इंद्रजीत सिंह कांग्रेस में थे। सहानुभूति और बड़े भाई के प्रभाव के बावजूद 2009 में यादवेंद्र सिंह जगदीश यादव से महज 4200 वोटों से जीत पाए। 2005 व 2009 में यादवेंद्र विधायक रहे। कांग्रेस छोड़ 2014 में राव इंद्रजीत की भाजपा में एंट्री, कोसली सीट भी भाजपा के खाते में आई। सभी की पैरवी पर भाजपा से मैदान में उतरे बिक्रम यादव विधायक बने। 2019 में फिर यह सीट भाजपा ने जीती, जनता ने लक्ष्मण यादव चुना।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें