श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन जमकर झूमते श्रद्धालु। स्रोत : संस्था
- फोटो : खैरगढ़ में मां काली मंदिर से घंटा, श्रृंगार का सामान और दानपात्र से नकदी चोरी की घटना के बाद का नजारा। संवाद
रेवाड़ी। विश्व सनातन धर्म सेवा ट्रस्ट की ओर से अग्रवाल भवन में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन पं.काशीनाथ मिश्र ने त्रिकाल साधना का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि त्रिकाल संध्या का अर्थ है दिन में तीन बार प्रात :, दोपहर और सायं ईश्वर का ध्यान और प्रार्थना करना। यह साधना विशेषकर कलियुग में लाभकारी है। बारा हजारी जगन्नाथ मंदिर के पंडित टेकचंद और पंडित महेश चंद ने पंडित काशीनाथ मिश्र का पगड़ी पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम के मुख्य आयोजक नवीन भुराड़िया व रितु भुराड़िया ने कहा कि 29 दिसंबर को महायज्ञ के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। इसके बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा।