रेवाड़ी। मौसम ने फिर से करवट ली है। वीरवार शाम हुई बूंदाबंदी ने किसानों को अपनी सरसों की फसल में नुकसान को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने 20 मार्च की शाम को आंधी, बूंदाबांदी और ओलावृष्टि की आशंका जताई है और किसानों को सचेत किया है। उधर बूंदाबांदी के कारण मौसम में ठंडक भी बढ़ी है और तामपान में गिरावट आ गई है। दो दिन में न्यूनतम और अधिकत तापमान में चार डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है।
वीरवार शाम को जिले के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में बूंदाबांदी के कारण किसानों की खेत में कटी हुई सरसों फसल भीग गई है हालांकि नुकसान नहीं हुआ है लेकिन जिस तरह शुक्रवार को मौसम रहा उसने किसानों को अपनी सरसों की फसल को लेकर चिंता है। उधर मौसम विभाग ने 20 मार्च तक मौसम में बदलाव रहने की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार शुक्रवार को सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे। शनिवार को गरज चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर की गति से हवा चलने की संभावना है। वहीं 19 और 20 मार्च तक गरज और चमक के साथ बादल छाने और कहीं छिटपुट बूंदाबांदी हो सकती है। तेज हवा चलने और वर्षा की स्थिति में खेतों में खड़ी सरसों और गेहूं की फसल बिछने से दाने जमीन पर बिखरने से नुकसान होने का अंदेशा बना हुआ है। शुक्रवार को दिनभर आसमान में बादल छाने और हवा चलने से अधिकतम व न्यूनतम तापमान में गिरवट दर्ज की गई। वीरवार को न्यूनतम 18.0 जबकि अधिकतम तापमान 31.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। वहीं शुक्रवार को अधिकतम तापमान जहां 29.5 डिग्री सेल्सियस रहा वहीं न्यूनतम तापमान बढ़कर 17.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बुधवार को अधिकतम तापमान इस मौसम का सर्वाधिक 34.4 और न्यूनतम 14.5 डिग्री सेल्सियस था।
सरसों की कटाई में आई तेजी
मौसम विभाग की भविष्यवाणी को देखते हुए फसल कटाई में तेजी आने लगी। गांवों में फसल कटाई के लिए श्रमिक नहीं मिलने से किसान अधिक से अधिक समय कटाई में जुटे हुए हैं। इसी प्रकार मंडी में जगह जगह सरसों की ढेरियां लगी हुई हैं। किसानों का मानना है कि अनाज की बिक्री होती है तो नुकसान से बचाव होगा। किसान अपनी फसल काटकर उसे सुरक्षित रखने में जुट गए हैं।
वर्जन:
शनिवार को दोपहर बाद मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। गरज चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। तेज हवा और आंधी आने की संभावना भी बनी है। एक दो स्थानों पर ओलावृष्टि की आशंका भी है। किसान अपनी कटी हुई सरसों की फसल को पहले ही सुरिक्षत जगह बचाव के लिए रख लें ताकि नुकसान न हो।
- डॉ. चंद्रमोहन,पर्यावरण विशेषज्ञ