रेवाड़ी। जिले में 2 लाख पशुओं का इलाज रामभरोसे चल रहा है। इलाज के लिए जरूरी दवाइयों का लगभग एक साल से अभाव है। जिले के अधिकतर पशु अस्पताल में पशुओं के पेट के कीड़े मारने के लिए दवाए चारा न खाने और प्रजनन संबंधित दवाइयां लंबे समय से नहीं हैं।
पशु अस्पतालों में ओपीडी की बात करें, तो 70 फीसदी पशुओं में इस प्रकार की शिकायत मिलती हैं। कोई चारा नहीं खा रहा, तो किसी के पेट में कीड़े की समस्या होती है। वर्तमान में पशुओं में बांझपन भी बढ़ा है। पशुओं के प्रजनन के लिए भी जिले की किसी भी पशु अस्पताल में दवाइयां नहीं हैं। ऐसे में पशुपालकों के सामने बड़ी समस्या पैदा हो गई है। बीमार होने पर अपने पशुओं को दिखाने के लिए आने वाले पशुपालकों को बाहर से ही दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं। इससे उनको अतिरिक्त आर्थिक भार भी उठाना पड़ रहा है।
राजकीय पशु अस्पतालों में चिकित्सकों की भी बड़ी कमी चल रही है। लंबे समय से 18 वेटरनरी सर्जन के पद रिक्त हैं। जिले में सिर्फ 38 पशु चिकित्सक कार्यरत हैं। इसी तरह वीएलडीए के भी 123 में से 32 पदों को भरा नहीं जा सका है। बता दें कि जिले में 52 पशु चिकित्सालय और एक पॉलीक्लिनिक और 63 पशु औषधालय संचालित है।
पॉली क्लिनिक में नहीं होते अल्ट्रासाउंड और एक्सरे
पशुधन के अच्छे स्वास्थ्य, पशु नस्ल सुधार, पशु प्रजनन, बीमारियों की देखभाल व चिकित्सा सुविधा के लिए एक दशक पूर्व गांव सहारनवास में पॉली क्लिनिक की स्थापना की गई थी। पॉली क्लिनिक में डॉक्टर तो हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं है। यह पॉली क्लिनिक रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले के लिए बेहतर सुविधाओं के लिए खोला गया थाए लेकिन बनने के बाद से अब तक इसमें कोई सुविधा नहीं है। यहां पशुपालक सिर्फ पशुओं के खून और दूध की जांच करा सकते हैं। सबसे जरूरी है कि अगर किसी पशु ने कोई लोह अथवा कठोर पदार्थ निगल लिया, तो यहां अल्ट्रासाउंड और एक्सरे की सुविधा नहीं है। इसके बिना पशुओं की सर्जरी करना संभव नहीं है। ऐसे में इस सुविधा के लिए पशुपालकों को अपने पशुओं को हिसार ही ले जाना पड़ता है। महीने में ऐसी स्थिति के 4 से 5 पशु आ जाते हैं। जिनको अल्ट्रासाउंड व एक्सरे की जरूरत पड़ती है।
इन पशु अस्पतालों में पशु चिकित्सक नहीं
जिले के सादतनगर, नाहड़, झोलरी, टूमना, गुगोढ़, माजरा श्योराज, मीरपुर, नंगली गोधा, सुनारिया, मस्तापुर, चिल्हड़, संगवाड़ी और डूंगरवास सहित कई अस्पतालों में पशु चिकित्सक नहीं है। डॉक्टर के न होने से पशुपालकों के सामने अपने पशुओं का इलाज कराना चुनौती बना हुआ है। साथ ही दवाइयों की कमी भी अब उनके लिए समस्या बन गई है।
वर्जन
राजकीय पशु अस्पतालों में जो दवाइयां उपलब्ध नहीं है, उसके लिए उच्च अधिकारियों को मांग पत्र लिखा गया है।-डॉ. नसीब सिंह, उपनिदेशक पशुपालन विभाग