बावल। प्राणपुरा रोड पर बसे गांव तिहाड़ा को लगभग 300 साल पहले अजमेर(राजस्थान) से आए हिम्मत सिंह ने बसाया था। यहां सभी समाज के लोग मिलकर रहते हैं। गांव में जाट समाज के लोगों की संख्या अधिक है। गांव में 3 हजार से अधिक जनसंख्या और 1700 से अधिक मतदाता हैं। गांव में मसानी माता की काफी मान्यता है। आसपास के गांव के लोग भी पूजा-अर्चन करने के लिए आते हैं। वहीं पशु अस्पताल, उप स्वास्थ्य केंद्र, सरकारी परिवहन की सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि बासोड़ा के दूसरे दिन मसानी माता का मेला लगता है। इसमें एक महीने पहले युवा तैयारी में जुट जाते हैं। गांव में विकास कार्य भी बहुत हुए हैं। अमरजीत ने बताया कि गांव के अधिकांश युवा सेना में शामिल होकर देश की सेवा कर रहे हैं। गांव में कई स्वतंत्रता सेनानी भी हुए हैं। इससे युवाओं को प्रेरणा मिलती है। लोगों में आपसी भाईचारा भी बहुत अच्छा है। गांव के बेटे वैज्ञानिक बनकर गांव ही नहीं हरियाणा का भी नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पंचायत में बैठकर ही मामला ज्यादातर निपटाने का प्रयास किया जाता है। गांव का भाईचारा बहुत मजबूत है।
शिक्षा और खेल प्रतियोगिता में भाग लेते हैं ग्रामीण
ग्रामीण सुरेश कुमार ने बताया कि गांव के दो युवा चेतन प्रसाद और सत्य प्रकाश बाबा परमाणु अनुसंधान केंद्र में कार्यरत हैं। गांव की एक बेटी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलवारबाजी में अपना लोहा मनवा चुकी है। गांव के हुकुमचंद कबड्डी में राष्ट्रीय स्तर पर गांव का नाम रोशन कर चुके हैं। गांव में शिक्षा का स्तर अच्छा है। गांव के लोग स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर शिक्षा व खेल प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। हालांकि, पशु अस्पताल, उप स्वास्थ्य केंद्र, सरकारी परिवहन की सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को काफी परेशानी भी उठानी पड़ रही है।