बावल। औद्योगिक इकाइयों से घिरा बनीपुर गांव बणी को काटकर बसाया गया था। नारनौल के गांव डेरोली जाट से लगभग 400 वर्ष पूर्व आए खुशाला राम ने बसाया था। बणी को काटने के कारण ही गांव का नाम बनीपुर पड़ गया। ग्रामीणों के अनुसार लगभग 400 वर्ष पूर्व खुशाला राम ढिल्लो अपने सात भाइयों व साली के लड़के दलीप के साथ पहुचे थे।
खुशालाराम और दलीप ने यहां की बणी काटकर खेती शुरू कर दी। बणी के अधिक होने के कारण ही गांव का नाम बनीपुर पड़ गया। अन्य छह भाइयों ने आसपास अलग गांव बसा लिए थे। गांव में प्राचीन ऐतिहासिक बाबा अमरनाथजी का मंदिर है। जहां भादव के मास में बड़ा मेला लगता है। मेले में दिल्ली, यूपी, राजस्थान के लोग शामिल होते हैं। बाबा अमरनाथ के चलते ही गांव की धार्मिक पहचान है। अमरनाथ के नाम से लगभग 104 वर्ष प्राचीन ऐतिहासिक तालाब है। भाद्रपद की अमावस्या को लगने वाले मेले में देशभर के लोग पहुचते हैं।
3 हजार की जनसंख्या के साथ 1800 मतदाता हैं मौजूद
गांव में लगभग 3 हजार की जनसंख्या और लगभग 1800 मतदाता मौजूद हैं। गांव में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ साथ खेल का मैदान भी बनाया गया है जिसमें युवा सेना में भर्ती होने की तैयारियां करते हैं। औद्योगिक इकाइयों से घिरा होने के साथ-साथ युवाओं में सेना में भर्ती के लिए विशेष उत्साह रहता है। समाजसेवी रणधीर सुमेर ने बताया कि गांव में स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने से लेकर पुलिस के उच्च पदों पर भाग लेने वाले जवान भी मौजूद हैं।
1962 में गांव को प्रदेश में राजनीतिक पहचान थी मिली
1962 में गांव को प्रदेश में राजनीतिक पहचान मिली थी। संयुक्त हरियाणा पंजाब के समय 1962 में रेवाडी व बावल एक ही विधानसभा हुआ करती थी। प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री राव बीरेंद्र सिंह की बहन सुमित्रा देवी के खिलाफ गांव के हुकम सिंह ने विधानसभा चुनाव लड़कर गांव को राजनीतिक पहचान दिलाई थी। गांव शुरू से ही राजनीतिक रूप से जागरूक रहा है।
रेवाड़ी। गांव में स्थित प्राचीन मंदिर। संवाद