रेवाड़ी। एक महिला ने अपने ससुर पर पिता की ओर से दी गई कार को धोखाधड़ी से बेचने के आरोप लगाया है। मामले में जांच अधिकारी पर भी सवाल उठाए गए हैं। मामला पुलिस अधीक्षक के आदेश के बाद दर्ज हुआ है।
पुलिस को दी शिकायत में बावल के गांव टिकला निवासी निवासी पीड़ित महिला ने बताया कि उसकी शादी गांव मोहम्मदपुर निवासी के साथ 22 फरवरी 2019 को हुई थी। 3 सितंबर 2022 को उसके पति की मृत्यु हो गई। उसके पति के नाम एक ईको गाड़ी रजिस्टर्ड थी। पीड़ित महिला का कहना है कि उस समय उसके पिता ने जीवन यापन करने के लिए अपने पैसों से वह गाड़ी खरीद कर दी थी। क्योंकि उसके पति के पास कमाई का कोई भी जरिया नहीं था। जब गाड़ी ली तो उस समय 2 लाख रुपये डाउन पेमेंट की थी। पीड़ित महिला का आरोप है कि उसके ससुर ने 23 मार्च 2023 को झूठा हलफनामा देकर एक व्यक्ति को वह गाड़ी बेच दी। जबकि खरीदने वाला शख्स इस बात को जानता था कि यह गाड़ी उसके पति के नाम थी।
मामले में जब पीड़ित महिला ने 17 मई 2023 को शिकायत बावल थाने में दी तो वह शिकायत आईओ बीर सिंह के पास पहुंची। मगर आईओ ने अर्जी पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की।
पीड़ित महिला ने दर्ज शिकायत में आरोप लगाया है कि जांच अधिकारी द्वारा मिली भगत कर डराया धमकाया गया है। साथ में यह भी कहा कि डीजीपी के पास चले जाओ या खट्टर पास कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता।
आरटीआई से हुआ फर्जी हस्ताक्षर का खुलासा
पीड़ित महिला का कहना है कि मामले में जब उसने रजिस्ट्री अथॉरिटी बावल में आरटीआई द्वारा पता किया तो मालूम चला की धोखाधड़ी से झूठे हस्ताक्षर करके फर्जी कागजात तैयार कर वह गाड़ी बेची गई है। जबकि उसके पति की 2022 को ही मृत्यु हो चुकी थी। गाड़ी के बेचने से संबंधित कागजात 2023 में फर्जी तरीके से तैयार किए हुए दिखा रहे थे। फिलहाल महिला का कहना है उसके पास आमदनी का कोई भी जरिया नहीं है वह गाड़ी को अपने पास ही रखना चाहती है। साथ ही आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। मामले में दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
जांच अधिकारी बीर सिंह ने कहा कि पुलिस पर ऐसे आरोप लगते रहते हैं
पूरे मामले में गौर करने वाली बात यह भी है कि जिस जांच अधिकारी द्वारा जांच ठीक प्रकार से नहीं की गई और महिला को दर-दर की ठोकरे खानी पड़ी। उसी जांच अधिकारी को फिर से इस केस को देखने के लिए लगाया गया है। मामले में जांच अधिकारी बीर सिंह का कहना है कि पुलिस पर ऐसे आरोप लगते रहते हैं। महिला द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं।