रेवाड़ी। रखरखाव के लिए निजी संस्थाओं को पार्क सौंपने की फिर से तैयारी की जा रही है, लेकिन नगर परिषद ने अभी तक पिछला भुगतान संस्थाओं को नहीं किया गया है। इसी बीच खींचतान के बाद पार्कों के करार के 1 साल भी पूरे हो गए हैं। आचार संहिता हटने के बाद जून में संस्थाओं को पार्कों को सौंपा जाएगा। वर्तमान में पार्क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं।
मौजूदा समय में नगर परिषद के ठीक सामने स्थित सुभाष पार्क में भी कई हिस्सों में घास गायब हो चुकी है। तुलाराम पार्क के साथ ही नेहरू पार्क भी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। सरकुलर रोड पर ब्रास मार्केट में बना पार्क भी खस्ताहाल है। यहां तक की सेक्टरों के पार्क भी खराब स्थिति में पहुंच रहे हैं। ये हाल तब है जब नगर परिषद ने इनकी देखभाल के लिए ठेका दिया हुआ था, लेकिन न तो नगर परिषद के अधिकारियों ने इसकी मॉनिटरिंग की और न ही ठेका लेने वाली संस्थाओं का भुगतान समय से किया गया। करीब 4 माह की ही पेमेंट दी गई। इसके बाद बहुत से पार्कों में तो संस्थाओं ने ही काम करना छोड़ दिया था। यहां सवाल उठता है कि पार्कों में जो झूले टूटे हैं और नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कौन करेगा। मौजूदा समय में अधिकतर पार्क में झूलों की दशा दयनीय हो चुकी है। पार्क में सुंदरीकरण के नाम पर जो व्यवस्था बनाई गई थी वह भी चौपट हो चुकी है।
पिछली पेमेंट ना देने की वजह से अब संस्थाएं भी पार्कों की देखरेख को लेकर अपने पैर पीछे खींच रही है। ऐसे में दोबारा संस्थाओं का मिलना भी काफी मुश्किल है। राव तुलाराम पार्क, नेहरू पार्क, सुभाष पार्क व ब्रास मार्केट पार्क का ठेका रेजांगला पार्क विकास समिति के संरक्षक परमात्मा शरण यादव को दिया गया था। परमात्मा शरण का कहना है कि वह अब कोर्ट में जाने की तैयारी कर रहे हैं। अप्रैल 2023 में ठेका दिया था, जोकि अब पूरा हो चुका है। जबकि पेमेंट सिर्फ जुलाई 2023 तक की ही दी गई है। अभी तक 8 महीने की पेमेंट नहीं मिली है, जोकि करीब 24 लाख रुपये है। कहा कि अधिकारियों के पास जाने के बाद भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है। यही कारण है कि अब कोर्ट में जाने का फैसला लिया है।
इंसेट
कार्य का मांगा ब्योरा
सेक्टर-3 के प्रधान यशपाल का कहना है कि वह जब पेमेंट के लिए नगर परिषद के अधिकारियों के पास गए तो उन्हें बताया गया कि पिछले महीनों का वह अपने कार्य का ब्योरा लेकर आएं। यशपाल का कहना है कि उन्हें प्रधान बने हुए कुछ ही समय हुआ है। ऐसे में पिछले महीनों का वह ब्योरा कैसे देंगे। जबकि ब्योरा पुराने प्रधान ने सौंप दिया था। सेक्टर 4 के प्रधान सुरेंद्र का कहना है कि भुगतान को लेकर काफी परेशान किया जा रहा है। नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि टेंडर करने के बाद पैसा देंगे। कुछ समझ ही नहीं आ रहा है।
वर्जन
इस बार शुरूआत से ही पार्कों की मॉनिटरिंग की जाएगी। रखरखाव का ठेका लेने वाली संस्थाओं से तालमेल बनाकर काम कराया जाएगा। आचार संहिता के चलते अभी प्रक्रिया रुकी है। जहां तक भुगतान का सवाल है, उसका भी निपटारा जल्दी करा दिया जाएगा। पार्कों की देखरेख को लेकर नगर परिषद गंभीर है।- पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद
रेवाड़ी। नेहरू पार्क में टूटे पड़े झूले। संवाद
रेवाड़ी। नेहरू पार्क में टूटे पड़े झूले। संवाद