रेवाड़ी। जिले में आढ़तियों की हड़ताल का अनाज मंडी में कोई असर दिखाई नहीं दिया। सामान्य दिनों की तरह बाजरा और कपास की खरीदारी जारी रही। रेवाड़ी क्षेत्र में धान की फसल न होने के कारण आढ़ती व व्यापारी हड़ताल में शामिल नहीं हुए। रेवाड़ी, बावल और कोसली में बाजरे की खरीद का कार्य निरंतर रूप से चल रहा है। हालांकि किसानों को औन पौने दामों में बाजरा बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।
जिले में बाजरे की सरकारी खरीद शुरू नहीं की गई है, ऐसे में व्यापारी निजी तौर पर बाजरा खरीद रहे हैं। सरकार ने बाजरे का समर्थन मूल्य 2350 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया हुआ है। जबकि सोमवार को रेवाड़ी की मंडी में बाजरे की बोली 1710 रुपये प्रति क्विंटल से 1760 रुपये तक पहुंची। पिछले सोमवार की बात की जाए तो रेवाड़ी की अनाज मंडी मेँ बाजरे का भाव 2100 रुपये प्रति क्विंटल था, लेकिन एक एक सप्ताह के दौरान में बाजरे के भाव में करीब साढ़े 300 रुपये की गिरावट आई है। वहीं सरकारी भाव को देखा जाए तो करीब 600 रुपये के घाटे में किसान बाजरा बेचने को मजबूर हैं।
अगर बात कपास के प्रति क्विंटल भाव की करें तो इस मंडी में देशी कपास अधिक मात्रा में आती है। इस बार इसका भाव आठ हजार से 10 हजार रुपये के बीच बोला जा रहा है। इस बार बाजरे का दाना हल्का है और उसमें नमी कम है। बारिश कम होने की वजह से इस बार बाजरे का दाना सफेद है और उसमें काला दाना नहीं होने की वजह से इसका बाजार भाव करीब डेढ़ सौ प्रति क्विंटल बढ़कर बोला गया। मार्केट कमेटी ने जिले की कोसली, बावल व रेवाड़ी मंडी में बाजरा और कपास फसल लेकर आने वाले किसानों के लिए जरूरी कदम उठाए हैं। सुलभ शौचालय, पेयजल और आराम के प्रबंध किए हैं।
रेवाड़ी क्षेत्र में धान की फसल नहीं होती। बाजरा और कपास का क्षेत्र है। इसकी वजह से अनाज मंडी धान की फसल नहीं आती। इसलिए हर रोज की तरह बाजरे और कपास की खरीद जारी रही। आढ़तियों ने हड़ताल में हिस्सा नहीं लिया है। हम सरकार के साथ हैं। यहां पर कोई विरोध नहीं हुआ। - अशोक यादव, प्रधान व्यापार संघ, रेवाड़ी।