रेवाड़ी। 23 सितंबर 1989 को शहीदी दिवस के मौके पर रेवाड़ी को तत्कालीन मुख्यमंत्री चौ. देवीलाल ने जिला बनाने की घोषणा की और इस पर अमल पहली नवंबर 1989 को हुआ। पहले पेयजल की समस्या से लेकर सड़क, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस एवं प्रशासनिक व्यवस्था सभी क्षेत्रों में दक्षिण हरियाणा हर पंक्ति में अंतिम पायदान पर था, लेकिन 2022 में कुछ बदला। गठन के समय इसकी आबादी करीब 56 हजार थी। अब 10 लाख से अधिक पहुंच गई है।
जिला मुख्यालय रेवाड़ी के अलावा तीन अन्य प्रमुख कस्बों, धारूहेड़ा, बावल और कोसली आज भी विकास की बांट जोह रहे हैं। हर शहर की अपनी समस्या है। जिला मुख्यालय रेवाड़ी के लोग वाहनों की बढ़ती संख्या से परेशान हैं। रेवाड़ी शहर में सीसीटीवी कैमरे हों या फिर ट्रैफिक लाइटें खराब पड़ी हैं। बेसहारा पशुओं की वजह से लोग चोटिल होकर अस्पताल तक पहुंच गए, तो कुछ लोग जान तक गंवा चुके हैं। सीवर हो या फिर जलभराव, पेयजल हो, नहरी जल सब मामलों में जिला रेवाड़ी को सरकार से वित्तीय मदद की बाट देखनी होती है।
सतलुज यमुना संपर्क नहर से नीला पानी कई दशक बीतने के बावजूद दक्षिण हरियाणा की प्यास बुझाने के लिए नहीं मिला। जिले का खंड खोल के करीब 40 गांव आज भी डार्क जोन में हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा होने के बावजूद यहां विकास की गति तेज दिए जाने की सख्त जरूरत है।
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एक नजर
- जनसंख्या - जिले के गठन से आज साल 2022 की अनुमानित - 10 लाख से अधिक, पुरुष - 540,74 जबकि महिलाएं - 485,636
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जनगणना, 2011 के अनुसार
2011 में रेवाड़ी की कुल आबादी - 900,332, पुरुष 474,335 व महिलाएं - 425,997
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क्षेत्र (प्रति वर्ग कि.मी.)1,594
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घनत्व (प्रति वर्ग कि.मी.) - 565
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लिंग अनुपात - 898
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कुल साक्षर 636,947 साक्षर पुरुष - 375,453 व साक्षर महिलाएं - 261,494
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साक्षरता (प्र.) - 80.99% साक्षरता पुरुष (प्र.) 91.44% व साक्षरता महिलाएं (प्र.) 69.57%
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रेवाड़ी की आबादी - धर्म अनुसार
जनगणना 2011
धर्म - आबादी - प्रतिशत - अनुमानित संख्या 2022 में
हिंदू - 889133 - 98.76% - 1013612
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मुस्लिम - 571 - 30.63% - 6513
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ईसाई - 70 - 10.08% - 799
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सिख - 180 - 40.20% - 2057
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बौद्ध - 20 - 20.02% - 230
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जैन - 152 - 50.17% - 1739
अघोषित -124 - 20.14% - 1416
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अन्य -12 - 0.00% - 14
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कुल - 900332 - 100त्न - 1,026,378
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जिले में कुल गांव - 389, कुल ग्राम पंचायत - 365 उपमंडल - 3( रेवाड़ी, बावल और कोसली), तहसील-3(रेवाड़ी, बावल, कोसली), उप तहसील -4 (धारूहेड़ा, मनेठी, डहीना, पाल्हावास।
विकास खंड - 7( रेवाड़ी, बावल, जाटूसाना, नाहड़, खोल, डहीना, धारूहेड़ा।
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पुलिस व्यवस्था
साउथ रेंज एडीजीपी कार्यालय, एसपी कार्यालय, थाने-14, पुलिस चौकी - 10, आरपीएफ और जीआरपी थाने अतिरिक्त। --------------------
जिले में 99 प्रतिशत लोग हिंदी भाषी हैं। जबकि एक प्रतिशत लोग अन्य भाषा बोलते हैं।
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कोट
- जिला बनने के बाद बहुत कुछ बदला है। पहले पेयजल की समस्या थी, उसमें काफी सुधार हुआ। परिवहन सुविधाएं बेहतर हुई। रेवाड़ी और बावल शहर में अभी जलभराव की समस्याएं हैं, जिनका ठोस समाधान किए जाने की जरूरत है। नितिन कौशिक, बार प्रधान बावल।
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रेवाड़ी के जिला बनने के बाद आबादी बढ़ने के साथ समस्याएं बढ़ी हैं। सभी काम सरकार के कंधों पर डालने की बजाए लोगों को जिम्मेदारियों का निर्वहन करना भी जरूरी है। अभी नहर आने पर ही पेयजल उपलब्ध हो पाता है। राशनिंग करके पीने के पानी की व्यवस्था होती है।- सुरेंद्र वशिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता।
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शहर की सड़कें लगातार बढ़ती जनसंख्या का दबाव झेल रही हैं। वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। आधुनिकता की दौड़ में संसाधन कम और घरेलू खर्च बढ़े हैं। जिले में विकास पर भी धनाभाव का साया नजर आता है। - पवन कुमार युवा, धारूहेड़ा।
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आबादी बढ़ने के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ा है। लोगों की सोच बदली है। घरों में महिलाएं भी सामाजिक मुद्दों पर बात करती हैं। रोजगार के अवसर कम हुए हैं। शिक्षण संस्थाओं में सीटें बढ़ाया जाना जरूरी है।- शमशेर यादव एडवोकेट, बार प्रधान रेवाड़ी।
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रेवाड़ी जिला बनने के बाद यहां बदलाव हुए हैं। शहरों जैसी सुविधाएं गांवों तक पहुंची हैं। परिवहन व्यवस्था बेहतर हुई है। जहां पहले पेयजल के लिए लोगों को तरसना पड़ता था, वह अब आसानी से मुहैया है। कुछ नई विकास परियोजनाएं पूर्ण होने के बाद जिले की तरक्की दुनिया की नजरों में होगी। - डॉ. बनवारी लाल, सहकारिता मंत्री।
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जिला बनने के बाद शहर में काफी कुछ बदला है मगर लोगों के मनमाफिक काम करने की न तो सरकार की नीयत रही और न ही अधिकारियों ने जनभावनाओं के अनुसार काम किया। जलभराव, यातायात जाम की समस्याएं आम हैं। विकास को जहां कांग्रेस ने छोड़ा था, उसे नई सरकारें आगे बढ़ाने में पीछे रह गई। - चिरंजीव राव, विधायक रेवाड़ी।
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जिला लगातार बदल रहा है। जिला बनने के बाद रेवाड़ी विकास के पथ पर अग्रसर है। करोड़ों रुपये के विकास कार्य रेवाड़ी में हर साल होते हैं। कुछ समस्याओं के समाधान की कोशिशें जारी हैं। - पूनम यादव, चेयरपर्सन नगर परिषद रेवाड़ी।
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जब से रेवाड़ी जिला बना, लगातार आबादी बढ़ी। बावल हो या रेवाड़ी, धारूहेड़ा या कोसली, सब जगह वाहनों की कतार दिखती है। हां, स्कूल-कालेज, आईटीआई, बहुतकनीकी संस्थान बढ़े हैं। नए अस्पताल खुले हैं। अभी सीवर, सफाई व्यवस्था, सड़क सुधारीकरण की जरूरत है। गांवों में आम रास्तों व सरकारी भवनों की सुध ली जानी चाहिए। - डॉ. अशोक कुमार यादव, प्राचार्य एवं प्रबुद्घ शिक्षाविद बावल।
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जिले में लगातार सरकार विकास कार्यों को साकार रूप दे रही है। जिला बनने से पहले शहरी और गांवों में विकास कार्य कराने के लिए लोग भटकते थे। अब गांवों तक स्वास्थ्य और शिक्षा पहुंच रही है। जल्द एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जाते हैं, यह बेहतर परिवहन व्यवस्था से संभव हुआ। अभी प्रयास जारी हैं। लक्ष्मण सिंह यादव, विधायक कोसली।
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फोटो - 01 से 08